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  • यह गैस रसोई ईंधन बनाती है और स्लरी खाद पैदावार बढ़ाती है.

गांव में अक्सर लोग गाय-भैंस के गोबर को सिर्फ उपले बनाने के ही इस्तेमाल में लाते हैं. ज्यादातर घरों में इसका इस्तेमाल चूल्हा जलाने या फिर खेतों में यूं ही फेंक देने में होता है. लेकिन बदलते वक्त के साथ आज गोबर की वैल्यू सिर्फ उपले बनाने तक ही नहीं रह गई है. अब गोबर किसानों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बन चुका है. बशर्ते सही तरीके और नई तकनीक अपनाई जाए. तो यही गोबर आपको हर महीने अच्छी कमाई दे सकता है.आज महंगे होते एलपीजी सिलेंडर और केमिकल खादों के भारी खर्च ने किसानों का बजट बिगाड़ रखा है. 

ऐसे में घरेलू बायोगैस प्लांट एक ऐसा समाधान है. जो आपकी रसोई का ईंधन फ्री करता है और खेतों के लिए एकदम बढ़िया क्वालिटी की खाद तैयार करता है. इसे लगाना काफी आसान है और सरकार भी इस पर आपको अच्छी-खासी मदद देती है. चलिए आपको बताते हैं कि गोबर गैस का घरेलू प्लांट कैसे काम करता है और इससे क्या फायदे हैं और इसे चलाते वक्त किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है.

कैसे बनता है घरेलू बायोगैस प्लांट?

घरेलू गोबर गैस प्लांट को घर के पास थोड़ी सी खुली जगह में आसानी से तैयार किया जा सकता है. इसके तीन हिस्से होते हैं जिनमें इनलेट, डाइजेस्टर टैंक और आउटलेट. सबसे पहले इनलेट में रोजाना ताजा गोबर और बराबर मात्रा में पानी मिलाकर एक गाढ़ा घोल बनाया जाता है. यह घोल पाइप के जरिए जमीन के अंदर बने पक्के डाइजेस्टर टैंक में जाता है. टैंक के अंदर हवा नहीं होती. जिससे बैक्टीरिया गोबर को सड़ाकर नेचुरल मीथेन गैस बनाते हैं. 

यह गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे आपकी रसोई में रखे बायोगैस चूल्हे तक पहुंच जाती है. गैस निकलने के बाद जो बचा हुआ पदार्थ होता है. वह आउटलेट चैंबर से बाहर तरल खाद यानी बायो-स्लरी के तौर पर अपने आप निकल आता है. आज बाजार में पक्के ईंट-सीमेंट वाले मॉडल के अलावा रेडीमेड फ्लेक्सी बायोगैस बैग भी मिलते हैं. जिन्हें एक ही दिन में आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है.

उपले बनाकर ही नहीं, इन तरीकों से भी कमाई कराता है गोबर

बायोगैस प्लांट के क्या फायदे?

घरेलू गोबर गैस प्लांट लगाने का सबसे बढ़ा फायदा यह है कि आपको हर महीने महंगे एलपीजी सिलेंडर भरवाने की जरूरत नहीं रहेगी. 2 से 3 मवेशियों के गोबर से 4 से 5 सदस्यों वाले परिवार का दोनों वक्त का खाना आराम से पक जाता है. दूसरा सबसे बड़ा फायदा है इससे निकलने वाली बायो-स्लरी. यह स्लरी यूरिया और डीएपी से कहीं ज्यादा ताकतवर ऑर्गेनिक खाद होती है. 

जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. इसे सीधे फसलों या सब्जियों में डालने से पैदावार 20 से 30 फीसदी तक बढ़ जाती है और केमिकल खाद का खर्च बिल्कुल खत्म हो जाता है. एक्सट्रा स्लरी को दूसरे किसानों और नर्सरी को बेचकर हर महीने बढ़िया अलग से इनकम भी कमाई जा सकती है.

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प्लांट चलाते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

गोबर गैस प्लांट से लगातार और अच्छी गैस पाने के लिए कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है. सबसे पहले आपको ध्यान रखना है कि घोल बनाते समय गोबर और पानी का सही रेशियो हो 1 भाग गोबर में 1 भाग ही साफ पानी मिलाएं. इसे न तो बहुत गाढ़ा रखें और न ही ज्यादा पतला. प्लांट के इनलेट में कभी भी साबुन का पानी, फिनाइल, डिटर्जेंट, प्लास्टिक या कंकड़-पत्थर न जाने दें. क्योंकि केमिकल्स से टैंक के अंदर मौजूद गैस बनाने वाले बैक्टीरिया मर जाते हैं. 

प्लांट को हमेशा ऐसी जगह लगाएं जहां दिनभर अच्छी धूप आती हो. क्योंकि गर्माहट मिलने से फर्मेंटेशन तेजी से होता है और गैस काफी बनती है. सर्दियों के मौसम में जब ठंड ज्यादा हो तो घोल बनाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें जिससे बैक्टीरिया एक्टिव रहें. साथ ही गैस पाइपलाइन में लगे वाटर-ट्रैप को रेगुलर चेक करते रहें जिससे पाइप में नमी न जमे और चूल्हे तक गैस का प्रेशर एकदम सही बना रहे.

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