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  • कांग्रेस शासन में ही मूर्तियाँ रखीं गई और 1992 में मस्जिद टूटी- साजिद रशीदी

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कई मुद्दों को लेकर कांग्रेस को घेरा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मोहब्बत की दुकान तो है, लेकिन मोहब्बत की दुकान में सामान भी तो होना चाहिए है ना, मोहब्बत का. दुकान तो है लेकिन मोहब्बत का सामान नहीं है. रशीदी ने कांग्रेस पर मौका देखकर राजनीति करने का भी आरोप लगाया. उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब AIMIM के नेता आसिम वकार ने कांग्रेस का दामन थामते हुए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लिया है.

मौलाना साजिद रशीदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ”आप मौका देखकर वार करते हैं, मौका देखकर बात करते हैं, जहां आपको लगता है कि मुसलमान गैदरिंग है, वहां मुसलमान की बात करते हैं, जहां आपको लगता है कि हिंदू गैदरिंग है, वहां हिंदू की बात करते हैं.”

कांग्रेस का कोई स्टैंड नहीं- साजिद रशीदी

साजिद रशीदी ने ये भी कहा कि आज के वक्त में कांग्रेस का कोई एक स्टैंड ही नहीं है. उन्होंने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का भी जिक्र किया. रशीदी ने कहा, ”अब राम मंदिर का पूरा मामला कांग्रेस के टाइम में हुआ, 1949 में मूर्तियां कांग्रेस के टाइम में रखी गईं, 1986 में ताला खोला गया, शिलान्यास हुआ, कांग्रेस की सरकार थी, बाबरी मस्जिद जब 1992 में टूटी तो कांग्रेस की सरकार थी, नरसिम्हा राव की सरकार थी तो ये सारा मामला कांग्रेस की सरकार में हुआ था और आज कांग्रेस इस बात को कहने को तैयार नहीं है.”

बाबरी मस्जिद की असली मुजरिम कांग्रेस है- साजिद रशीदी

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए आगे कहा, ”बाबरी मस्जिद की असल मुजरिम तो कांग्रेस है, बाबरी मस्जिद को तुड़वाने वाली, बाबरी मस्जिद के अंदर मूर्तियां रखवाने वाली, बाबरी मस्जिद में शिलान्यास कराने वाली, सारा कुछ तो कांग्रेस ने किया है.”

इससे पहले 30 अगस्त को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान का मौलाना साजिद रशीदी ने समर्थन किया था. उन्होंने नफरत और हिंसा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि मोहन भागवत का यह बयान ही हिंदुस्तान की असल रूह और सभ्यता है. दुनियाभर में हिंदुस्तान के अनेकता में एकता के लिए जाना जाता है. यहां अलग-अलग धर्म के लोग अपनी पूजा पद्धति के साथ एक साथ रहते हैं. लेकिन इस प्यार मोहब्बत को कहीं न कहीं पिछले दो दशकों से तोड़ने और नफरत में बदलने की कोशिश की गई.

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