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एक साधारण विमान यात्रा कब किसी यात्री के लिए परेशानी और लंबे इंतजार की वजह बन जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कुछ ऐसा ही मामला एक महिला यात्री के साथ हुआ, जिन्हें अपने बच्चे के साथ फ्लाइट में घंटों तक इंतजार करना पड़ा। बाद में उड़ान कैंसिल होने और उचित सुविधाएं नहीं मिलने का मामला इतना बढ़ गया कि इसे उपभोक्ता अदालत तक पहुंचाना पड़ा. 

2017 में बुक कि थी बिजनेस क्लास टिकट  

यह मामला साल 2017 का बताया रहा है, जिसे यह पता चलता है कि एक महिला यात्री ने अपने कोई ट्रैवल एंजेनट के जरिए लॅास एंजलिस से मुंबई तक जाने के लिए बिजनेस क्लास में अपना टिकट बुक कराया था. उनकी यह यात्रा बीजिंग के रास्ते होने वाली थी. वापसी कि उड़ान 19 जुलाई को लॅास एंजलिस से रवाना होने वाली थी. 

महिला ने बताया कि उनसे कहा गया था कि बोर्डिंग में लगभग दो घंटे की देरी होगी. हालांकि, बोर्डिंग के हो जाने के बाद भी विमान रनवे पर खड़ा रहा और कई घंटों तक उड़ान नहीं भरा. 

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बच्चे को भी नहीं मिला खाना-पीना

महिला ने शिकायत दर्ज करते हुए बताया कि विमान में लंबे इंतजार के चलते किसी भी यात्री को खाने पीने को नहीं पूछा गया. महिला का यह भी कहना था कि वह अपने बच्चे के साथ सफर कर रहीं थी, जिसके कारण उन्हें दूध तैयार करने के लिए गर्म पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया. 

थोड़ी देर के बाद जब यात्रियों को बताया गया कि विमान यात्रा रद्द कर दी गई है, तभी इसके चलते महिला और उनका बच्चा कई घंटों तक एयरपोर्ट पर रहे. उनके अनुसार इस दौरान भी उन्हें ना तो उचित भोजन मिला ना ही रहने कि व्यवस्था कि गई. 

एयरलाइन का जवाब 

एयरलाइन ने अपने बचाव में सफाई देते हुए कहा कि उस दिन भारी बारिश के चलते सभी उड़ाने रोक दी गई थीं. कंपनी का यह भी दावा था कि ऐसी स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर थी. इसके कारण विमान रद्द हो जाना या उड़ान में देरी हो जाने के चलते मुआवजा जारी नहीं किया जा सकता है. 

लेकिन जब उपभोक्ता आयोग ने उस दिन के मौसम से जुड़े रिपोर्ट पर नजर डाली, तब पता चला कि हालात इतने भी बुरे नहीं थे कि विमान यात्रा को रद्द कर दिया जाए. 

कंपनी को देना होगा 1.5 लाख का जुर्माना

उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के चलते अपना आदेश सुनाया, जिसमें फैसला लिया गया कि महिला और उनके बच्चे को हुई परेशानी के जिम्मेदार कंपनी है. जिसके चलते एयरलाइंस को 1 लाख मुआवजे के तौर पर और साथ ही में 50 हजार मुकदमे के रुप में जमा करना आवश्यक है.  

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