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पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे. कोलकाता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, जिसमें टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी.

याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पसंद के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की मांग की गई थी. कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे.

ऋतब्रत बने रहेंगे प्रतिपक्ष के नेता

इससे पहले,तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सोवंदेब चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख करते हुए उस सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को सदन में पार्टी के नए बहुमत गुट का नेता और आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष स्वीकार करने के फैसले को बरकरार रखा गया था.

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने इस मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. हालांकि उन्होंने कहा था कि मामले की सुनवाई उनकी अदालत में जारी रहेगी और अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी, लेकिन अगली सुनवाई से पहले ही सोवंदेब चट्टोपाध्याय ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी थी.

वर्तमान में 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायक हैं. इनमें से 60 विधायक विद्रोही लेकिन बहुमत वाले गुट के साथ बताए जा रहे हैं. ऋतब्रत बनर्जी ने सप्ताह दावा किया था कि उनके समर्थन में 64 विधायक हैं. वहीं, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार मूल तृणमूल गुट के साथ फिलहाल केवल 20 विधायक हैं.

क्या है पूरा मामला?

इस बीच, विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए उस प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी की जांच भी सीआईडी कर रही है, जिसमें सोवंदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उपनेता प्रतिपक्ष तथा फिरहाद हकीम को तृणमूल विधायक दल का मुख्य सचेतक नामित किया गया था. ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा द्वारा हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाए जाने के बाद सीआईडी ने जांच शुरू की. इसके तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने दोनों नेताओं को निलंबित कर दिया.

इसके बाद रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने बगावत करते हुए खुद को बहुमत वाला गुट बताते हुए नया प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा. विधानसभा अध्यक्ष ने इस नए प्रस्ताव को स्वीकार कर ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी थी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए पहले सिंगल बेंच में याचिका दायर की गई थी और अब उसके आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की गई है.



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