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उत्तराखंड में आसमान से बरसती मूसलाधार आफत अभी रुकी नहीं है. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के भीतर उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ यानि चमोली जैसे फ्लैश फ्लड की आशंका जताई है. चमोली में कुछ घंटों के भीतर इतनी मूसलाधार बारिश हुई कि नाले में सैलाब आ गया. चंद सेकेंड के भीतर पूरे इलाके का मंजर बदल गया. यहां एक पुल के बहने से मुख्य शहर से करीब 17 गांवों का संपर्क टूट चुका है. उत्तराखंड के अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, पिथौरागढ़ और हरिद्वार समेत 12 जिले ऐसे हैं, जहां आज रात को भी फ्लैश फ्लड आ सकता है. 

मैदान से पहाड़ तक आसमानी आफत

हालात सिर्फ पहाड़ पर ही बिगड़े हुए नहीं हैं. राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तक बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. सैलाब को अपनी तरफ बढ़ता हुआ देखकर एक जेसीबी मशीन और एक जिप्सी पीछे की तरफ हटने लगते हैं, लेकिन सैलाब की रफ्तार बहुत ज्यादा थी और पीछे हटने वालों की स्पीड बेहद धीमी. पुल के साथ पानी किनारे खड़ी स्कॉर्पियो को भी बहा ले गया. जो लोग वीडियो बना रहे थे वो इस मंजर को देखकर कांप उठे और उनकी चीखें दहशत की गवाही बनकर वहां गूंज रही थीं.

जिन लोगों ने इन तस्वीरों को अपनी आंखों से देखा उन्हें पिछले साल धराली में हुई तबाही याद आ गई. 5 अगस्त को उत्तराखंड के धराली में फ्लैश फ्लड आया था और मुख्य बाजार से लेकर होटल तक मलबे में बदल गए थे. चमोली में भी ठीक वैसी ही बाढ़ आई बस गनीमत ये रही कि चमोली में धराली जैसा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. उत्तराखंड में ऐसे एक दो नहीं बल्कि 45 स्थान हैं जहां धराली जैसी आपदा दस्तक दे सकती है. चमोली में आई तबाही सिर्फ एक मिनट के भीतर गुजर गई. 

पहाड़ से नीचे मैदान की तरफ भी स्थितियां खराब ही नजर आ रही थीं. राजस्थान के बूंदी में कुछ घंटों की बारिश के बाद सड़क पर दरिया बह निकला था और वाहन खिलौने की तरह बहते हुए दिखाई दे रहे थे. अक्सर जब दुनिया भर के वैज्ञानिक कुछ साल पहले तक कहा करते थे कि आने वाले वक्त में ग्लोबल वॉर्मिंग के गंभीर नतीजे भुगतने होंगे, लेकिन अब उनकी वो चेतावनी सच होने लगी है. अफसोस की बात ये है कि हम अपनी तरफ तेजी से पैर पसारने वाली मौसम की मुसीबत को रोक नहीं पाए और अब देश के अलग-अलग हिस्सों में इंसान तूफान से लेकर फ्लैश फ्लड के चंगुल में फंसता दिखाई दे रहा है. जुलाई महीने में देश के ज्यादातर हिस्सों में औसत से कम बारिश हुई, लेकिन अगस्त में इतनी भारी बारिश हो रही है कि तीन-चार दिन के भीतर कोटा ही पूरा हो जा रहा है. 

क्यों खतरनाक है ये बारिश

अगर सामान्य बारिश 10 दिनों में बंटकर 500MM तक होती तो पानी को जमीन से लेकर नदियों और जलाशयों तक पहुंचने का वक्त मिलता, लेकिन वही पानी अगर सिर्फ 1-2 दिन के भीतर बरस जाए तो फ्लैश फ्लड से लेकर शहरों के डूबने का खतरा मंडराता है. गुजरात से लेकर गुरुग्राम तक ऐसा ही होता हुआ दिखाई दे रहा है. बदलते हुए मानसून पैटर्न की ये सबसे बड़ी चुनौती है और ऐसी चुनौतियों से सिर्फ हिंदुस्तान नहीं, बल्कि दुनिया के कई देश से जूझ रहे हैं.



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