[wpcode id="23"]
BREAKING India Latest News | World News | Sports | Business | Entertainment | Technology | Weather Updates | Live News 24x7


देश में इन दिनों मानसून का मौसम चल रहा है. कई राज्यों में ठीक-ठाक बारिश हो चुकी है. तो कई जगहों पर बारिश कुछ जरूरत से ज्यादा हो रही है. बारिश का सिलसिला लंबा खिंच जाए तो बहुत से किसान अपनी खेती को लेकर काफी परेशानी में पड़ जाते हैं. लेकिन अगर पहले से ही इन बातों का ध्यान रखते हुए किसान कुछ तैयारी कर के चलें. तो यही बारिश किसानों के लिए कमाई का एक शानदार मौका साबित हो सकती है. अगस्त के महीने में अगर आप तरोई और गिलकी जैसी बेल वाली सब्जियों की बुवाई करते हैं. 

तो बेहद कम समय में आपकी जेब पैसों से भर सकती है. इन फसलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि बुवाई के महज 45 से 50 दिनों के भीतर इनकी पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि सितंबर के आखिरी दिनों और अक्टूबर की शुरुआत में आपकी ताजा फसल सीधे मंडियों में बिकने के लिए तैयार हो जाएगी. इस दौरान लगातार बारिश की वजह से मंडियों में हरी सब्जियों की सप्लाई काफी घट जाती है. जिससे तरोई और गिलकी के अच्छे थोक भाव मिलते हैं.

इन तरीकों से उगाएं सब्जी

अगस्त के मौसम में तरोई और गिलकी से भरपूर पैदावार लेने के लिए पुराने तरीके के बजाय मचान विधि का इस्तेमाल करना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है. खेत में बांस और लोहे के पतले तारों का ढांचा बनाकर जब बेलों को ऊपर चढ़ाया जाता है. तो पौधों को बराबर मात्रा में ताजी हवा और धूप मिलती है. इससे फल जमीन की नमी और कीचड़ के संपर्क में नहीं आते. 

जिससे फलों का रंग एकदम चमकदार हरा रहता है और उनकी लंबाई और क्वालिटी भी बेहतरीन बनी रहती है. इसके साथ ही बारिश के सीजन में खेतों में जलभराव सबसे बड़ा खतरा होता है. इससे बचने के लिए पौधों को हमेशा ऊंची मेड़ बनाकर ही लगाएं और खेत में पानी के निकलने का पूरा इंतजाम रखें जिससे कि फंगल इन्फेक्शन और जड़ सड़न की बीमारी का खतरा बिल्कुल भी न रहे.

अगस्त में बोएं ये सब्जी, सितंबर में होगी अच्छी कमाई

बढ़िया उत्पादन के लिए चुनें यह हाइब्रिड किस्में

किसी भी सब्जी की खेती में सही बीज का चुनाव बहुत जरूरी होता है. अगर आप चाहते हैं कि कम समय में पौधों से ज्यादा से ज्यादा फल आएं तो हमेशा उन्नत और अगेती हाइब्रिड किस्मों ही लें. तरोई और गिलकी की खेती के लिए वीएनआर आलोक, वीएनआर मोहिनी, जेके 710 और पूषा स्नेहा जैसी अगेती किस्में सबसे बेहतरीन मानी जाती हैं. यह किस्में न सिर्फ भारी बारिश को आसानी से झेल लेती हैं. 

बल्कि इनमें रोगों से लड़ने की ताकत भी काफी ज्यादा होती है. इन किस्मों की रोपाई करने से पौधों में तेजी से बेलें और कल्ले निकलते हैं. जिससे हर गांठ पर ढेरों फूल और फल सेट होते हैं. सही बीजों को चुनने से ही आपकी फसल की पहली तुड़ाई समय पर होती है और पूरे सीजन लगातार बढ़िया पैदावार मिलती रहती है.

अगस्त में बोएं ये सब्जी, सितंबर में होगी अच्छी कमाई

यह भी पढ़ें: धान की फसल पर पीले धब्बे, इस रोग की दस्तक

इन बातों का रखें ध्यान

पौधों की तेज बढ़वार और लंबे समय तक लगातार फल लेने के लिए शुरुआत से ही सही खाद देना बेहद जरूरी है. खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह सड़ी हुई देसी गोबर की खाद मिट्टी में मिलाएं और जरूरत के हिसाब से संतुलित मात्रा में एनपीके का इस्तेमाल करें. बारिश के मौसम में बेल वाली सब्जियों पर लाल कद्दू बीटल, रस चूसने वाले थ्रिप्स, सफेद मक्खी और फल मक्खी का हमला तेजी से होता है. 

सफेद मक्खी और थ्रिप्स वायरस फैलाते हैं. जबकि फल मक्खी फलों के अंदर अंडे देकर उन्हें सड़ा देती है. इन कीटों से बचाव के लिए खेत में पीला और नीला स्टिकी ट्रैप लगाएं और समय-समय पर नीम के तेल का नियमित छिड़काव करते रहें. अगर कीटों का प्रकोप ज्यादा दिखे तो जरूरत के हिसाब से कीटनाशक का हल्का स्प्रे करें.

यह भी पढ़ें: ट्रैक्टर खरीदने पर 2.45 लाख रुपये की सब्सिडी, जानें तरीका



Source link