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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग की. उन्होंने भाजपा नेताओं से भी अपील की कि वे इस मुद्दे को दिल्ली में केंद्र सरकार के सामने उठाने के लिए उनके साथ आएं. मुख्यमंत्री ने विवादित पार्क विधेयक को वापस लेने के अपनी सरकार के फैसले का भी बचाव किया.

यह विधेयक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और जनहित की परियोजनाओं के लिए पार्कों और बगीचों की 5 प्रतिशत भूमि के उपयोग की अनुमति देता था. विधेयक वापस लिए जाने पर भाजपा द्वारा इसे अपनी जीत बताने की आलोचना करते हुए शिवकुमार ने पार्टी को “विकास-विरोधी” करार दिया और कहा कि बेंगलुरु की मौजूदा समस्याओं के लिए भाजपा जिम्मेदार है.

कर्नाटक सरकार ने मांगी केंद्र से मदद

बागलकोट और विजयनगर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से पहले शिवकुमार ने कहा, “आपने भाजपा और जेडी(एस) की राजनीति देखी है. हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान किसानों और सूखे की स्थिति पर कोई चर्चा नहीं हुई.

यही वजह है कि विशेष सत्र बुलाया गया है.” उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मानसून सत्र के दौरान सूखे के मुद्दे पर चर्चा का अवसर नहीं मिलने से भाजपा और जेडी(एस) के कई विधायक भी नाराज थे. कांग्रेस के विधायकों ने भी इस संबंध में चिंता जताई थी.

पार्क विधेयक का बचाव

शिवकुमार ने कहा, “मैं किसानों की मदद करना चाहता हूं. केंद्र सरकार को भी इसके लिए आर्थिक सहायता देनी चाहिए. इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली ले जाने की जरूरत है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र भी कृषि ऋण माफी की मांग कर चुके हैं. जब प्रधानमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि राज्य सूखे की मार झेल रहा है, तो कृषि ऋण माफी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी चाहिए.”

उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक से अपील की कि वे उनके साथ दिल्ली चलें और केंद्र सरकार के सामने किसानों के ऋण माफी की मांग उठाएं, क्योंकि इस विषय पर अंतिम निर्णय केंद्र के हाथ में है.



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