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  • हाई न्यूट्रीशन वैल्यू और कम उपलब्धता इसे प्रीमियम बनाती है.

बाजार में आम मुर्गियों के मुकाबले काले रंग की कड़कनाथ मुर्गी की कीमत ज्यादा होती है इतनी कि जिसे सुनकर अक्सर लोग हैरान हो जाते हैं. कई लोगों के मन इसे लेकर यह सवाल आता है कि आखिर इस मुर्गी में ऐसा क्या खास है कि लोग ज्यादा पैसे देने के लिए तैयार रहते हैं. तो बता दें कड़कनाथ सिर्फ बाहर से काली दिखाई नहीं देती. बल्कि इसके शरीर के कई हिस्सों और मांस में भी गहरा रंग नजर आता है.

कड़कनाथ मध्य प्रदेश के झाबुआ और आसपास के इलाकों से जुड़ी देसी नस्ल है. इसकी अलग पहचान, कम उपलब्धता और बाजार में बनी प्रीमियम डिमांड इसे दूसरी मुर्गियों से अलग करती है. इसका पालन भी सामान्य ब्रॉयलर की तरह बहुत कम समय में तैयार होने वाला बिजनेस नहीं है. यही वजह है कि इसकी उत्पादन लागत और बाजार कीमत दोनों नार्मल चिकन से अलग रहती हैं.

कड़कनाथ का रंग इतना काला क्यों होता है?

कड़कनाथ की सबसे बड़ी पहचान इसका काला रंग है. इसके पंख, त्वचा और शरीर के कई हिस्सों में गहरा रंग दिखाई देता है. इसके पीछे शरीर में मेलानिन पिगमेंट से जुड़ी एक खास आनुवंशिक विशेषता जिम्मेदार होती है. यही कारण है कि इसका मांस भी नार्मल चिकन की तरह हल्के रंग का नहीं दिखता. 

जिसे देखकर पहली बार में लोग थोड़ा चौंक जाते हैं. एमपी के स्थानीय आदिवासी समुदाय इसे बहुत पवित्र मानते हैं और सालों से इसकी पारंपरिक देखरेख करते आ रहे हैं. अब इस नस्ल की लोकप्रियता देश के कोने-कोने तक पहुंच चुकी है और दूर-दूर के किसान इसे पालने में अपनी खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं. क्योंकि इसमें मुनाफा आम पोल्ट्री के मुकाबले कई गुना ज्यादा मिलता है.

नार्मल चिकन से ज्यादा क्यों रहती है कीमत?

कड़कनाथ की ज्यादा कीमत के पीछे एक बड़ी वजह इसकी धीमी ग्रोथ और सीमित सप्लाई है. कमर्शियल ब्रॉयलर मुर्गियां तेजी से वजन हासिल करने के लिए पाली जाती हैं और कम समय में बाजार पहुंच जाती हैं. इसके मुकाबले कड़कनाथ को तैयार होने में ज्यादा समय लग सकता है. जितने ज्यादा दिन मुर्गी फार्म पर रहेगी उतना ही फीड, देखभाल, जगह और लेबर का खर्च बढ़ सकता है.

दूसरी तरफ कड़कनाथ की अपनी अलग मार्केट भी है. देसी और खास नस्ल का चिकन पसंद करने वाले ग्राहक इसके लिए प्रीमियम कीमत देने को तैयार रहते हैं. अलग स्वाद और इसकी खास पहचान के कारण होटल, रेस्टोरेंट और सीधे ग्राहक तक बिक्री के मौके भी मिल सकते हैं. इसके अलावा इसमें अंदर औषधीय गुण और जबरदस्त न्यूट्रिशन वैल्यू है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसमें आम चिकन के मुकाबले फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बेहद कम होती है.

काले रंग की मुर्गी महंगी क्यों होती है, इनमें क्या होता है खास?

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लागत काटने के बाद होती है लाखों की कमाई

अगर इससे की जाने वाली कमाई की बात करें तो इस मामले में कड़कनाथ मुर्गी का बिजनेस किसानों को अच्छा मुनाफा देती है. अगर आप कमर्शियल लेवल पर 500 चूजों के साथ इसकी फार्मिंग शुरू करते हैं. तो सारा खर्चा चूजे, दाना, और दवाइयां निकालकर आसानी से 1.5 से 2 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार में इसका मांस 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक बिकता है. 

जबकि इसके एक चूजे की कीमत भी 70 से 100 रुपये तक आसानी से मिल जाती है. इसके अलावा इसके काले अंडों की डिमांड भी बहुत हाई रहती है. जो कि मार्केट में आम अंडों से काफी महंगे दामों पर बिकते हैं. यही वजह है कि कम पैसे लगाकर छोटी सी जगह में शुरू किया गया यह बिजनेस कुछ ही महीनों में किसानों को एकदम तगड़ा रिटर्न दे देता है.

काले रंग की मुर्गी महंगी क्यों होती है, इनमें क्या होता है खास?

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