27 अप्रैल को बटाला-अमृतसर नेशनल हाईवे पर चलती कार आग का गोला बन गई। ऐसा ही एक हादसा जालौन (यूपी) के नेशनल हाईवे-27 पर भी हुआ, जहां कार में अचानक आग लग गई। दोनों हादसों की वजह भीषण गर्मी और शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। गनीमत ये रही कि दोनों हादसों में जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही भी कार ब्लास्ट का कारण बन सकती है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: जगदेव कालसी, ऑटो एक्सपर्ट, दिल्ली सवाल- गर्मियों में कार ब्लास्ट का रिस्क क्यों बढ़ जाता है? जवाब- ज्यादा गर्मी से कार के अंदर प्रेशर बढ़ जाता है। अगर कार में डिओ, परफ्यूम, सैनिटाइजर या लाइटर जैसी ज्वलनशील चीजें हों तो ब्लास्ट का रिस्क बढ़ जाता है। बैटरी ओवरहीट होकर गैस बना सकती है। पेट्रोल लीकेज होने पर आग लग सकती है। सवाल- धूप में खड़ी कार का तापमान बाहर के तापमान से कितने डिग्री ज्यादा होता है? जवाब- सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, अगर बाहर का तापमान 40°C है और कार 20 मिनट तक धूप में खड़ी है तो अंदर का तापमान करीब 53°C तक पहुंच सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से समझें कि तेज धूप में खड़ी कार के भीतर तापमान किस तरह तेजी से बढ़ता है। सवाल- कार के किन हिस्सों का तापमान सबसे ज्यादा बढ़ता है? जवाब- जो हिस्सा धूप के सीधे संपर्क में होता है, वही सबसे ज्यादा गर्म होता ह
