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जरूरत की खबर- पैर में मोच आए तो क्या करें:फॉलो करें RICE थेरेपी, ये 7 संकेत दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं, ये 5 गलतियां न करें

​कभी चलते समय पैर गलत तरीके से मुड़ जाता है। कभी सीढ़ियां उतरते हुए संतुलन बिगड़ जाता है। कभी सड़क पर पैर गड्ढे में पड़ जाता है और पैर में मोच (स्प्रेन) आ जाती है। कई बार लोग मोच को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह लिगामेंट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। अगर समय पर फर्स्ट एड न मिले तो दर्द और सूजन बढ़ सकती है और ठीक होने में लंबा समय लग सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मोच को विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. आशीष दीवान, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पाइन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- मोच (स्प्रेन) क्या होती है? जवाब- मोच का मतलब- ‘लिगामेंट्स में चोट लगना’ है। आसान शब्दों में इसे ऐसे समझिए– सवाल- मोच और फ्रैक्चर में क्या फर्क है? जवाब- मोच आने पर लिगामेंट डैमेज होते हैं, जबकि फ्रैक्चर में हड्डी टूटती है। दोनों में दर्द और सूजन हो सकती है, लेकिन फ्रैक्चर ज्यादा गंभीर होता है। नीचे ग्राफिक में दोनों का अंतर समझिए- सवाल- पैर में मोच सबसे ज्यादा किस हिस्से में आती है? जवाब- सबसे ज्यादा टखने (एंकल) में मोच आती है। यह आमतौर पर चलते-दौड़ते, सीढ़ियां उतरते या खेलते समय पैर अचानक मुड़ने से होता है। टखने के बाहरी हिस्से के लिगामेंट्स सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए एंकल  

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