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नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नवी पिल्लई ने इस सम्मान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शेयर करने को लेकर मजाक किया. पुरस्कार जीतने के बाद नूर्नबर्ग में पिल्लई ने कहा, “अगर आप थोड़ी और तालियां बजाएंगे, तो शायद मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ शेयर कर लूं.” 

नवी पिल्लई को युद्ध अपराध, मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार के मामलों में मुकदमा चलाने और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया. डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जताई है. वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना 2025 का पुरस्कार ट्रंप के साथ शेयर करने की पेशकश की थी.

ट्रंप करते रहे हैं अपनी दावेदारी
इसके बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ से कहा था कि इसे स्वीकार करना बहुत सम्मान की बात होगी. हालांकि जब पुरस्कार के आयोजकों ने फैसला सुनाया कि इसे किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, तो व्हाइट हाउस ने कहा कि वह (डोनाल्ड ट्रंप) नोबेल शांति पुरस्कार के कई गुना हकदार हैं.

बता दें कि मचाडो को लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से शांतिपूर्ण बदलाव के लिए अभियान चलाने के कारण 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला. नोबेल समिति ने उन्हें हाल के समय में लैटिन अमेरिका में नागरिकों के साहस की सबसे असाधारण मिसालों में से एक बताया है.

मचाडो ने ट्रंप को दिया था अपना मेडल
15 जनवरी 2026 को मचाडो ने व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल ट्रंप को सौंपा. उन्होंने कहा कि यह कदम वेनेजुएला की आजादी के प्रति ट्रंप की प्रतिबद्धता को सम्मान देने के लिए था. ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें धन्यवाद दिया और इसे आपसी सम्मान का एक शानदार कदम बताया. हालांकि नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट ने स्पष्ट किया कि भले ही असली मेडल किसी और के पास जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार को बांटा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. 

कौन हैं नवी पिल्लई
नवानेथम पिल्लई का जन्म डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ. रवांडा के इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में शामिल होने से पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में अपनी सेवाएं दी. बाद में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर काम किया. इसके अलावा उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्र में UN जांच आयोग की अध्यक्षता की और अभी वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जज हैं, जो म्यांमार के खिलाफ नरसंहार के आरोपों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है.

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