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‘धुरंधर’ को लेकर प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है:‘तीन कौवे’ की डायरेक्टर प्रियंका घोष बोलीं- इस जॉनर में पहले भी काम किया है

​वेब सीरीज ‘द नाइट मैनेजर’, ‘द रॉयल्स’ और ‘ब्रोकेन बट ब्यूटिफुल’ जैसी परियोजनाओं के बाद डायरेक्टर प्रियंका घोष अब अपने नए प्रोजेक्ट ‘तीन कौवे’ के साथ सामने आ रही हैं। थ्रिलर और स्पाई जॉनर में उनकी पकड़ मानी जाती है। हमने उनसे इस सीरीज के आइडिया से लेकर मेकिंग तक की पूरी प्रक्रिया पर बातचीत की। ‘तीन कौवे’ का आइडिया कैसे आया? फिक्शनल है या रियल स्टोरी से प्रेरित? ये पूरी तरह फिक्शनल स्टोरी है। इसका आइडिया राइटर और क्रिएटर अब्बास टायरवाला ने 7–8 साल पहले सोचा था और इसे लंबी प्रक्रिया में डेवलप किया। जैसे-जैसे कहानी बढ़ी, किरदार और दुनिया बड़ी हुई। अंत में इसे फिल्म की बजाय सीरीज के लिए बेहतर माना गया। सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ अब्बास ने मुझे डायरेक्टर और को-क्रिएटर के तौर पर जोड़ा। ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद सेम जॉनर की ‘तीन कौवे’ को लेकर कोई प्रेशर महसूस हुआ? प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है। इस जॉनर में पहले भी काम किया है, जैसे ‘द नाइट मैनेजर’। हर जॉनर की अलग टोन और कहानी होती है। ‘तीन कौवे’ की दुनिया, किरदार और टोन पूरी तरह अलग हैं। बॉबी देओल और कबीर बेदी जैसी बड़ी कास्ट को कैसे ऑनबोर्ड किया गया? कास्टिंग डायरेक्टर के साथ कई ऑप्शन्स देखे। प्रोड्यूसर, राइटर और अमेजन प्राइम के साथ डिस्कशन के बाद एक्टर्स को नैरेशन दिया। सौभाग्य रहा  

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