पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. हाईकमान की सख्ती और नए प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की सक्रियता के बाद पार्टी के बड़े नेता भले ही अब एक मंच पर नजर आने लगे हों, लेकिन अंदर की नाराजगी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. शुक्रवार (25 सितंबर) को चंडीगढ़ में हुए कांग्रेस के रोष मार्च में भी यही तस्वीर देखने को मिली. नेता साथ दिखे, एक-दूसरे के सम्मान की बातें हुईं, लेकिन कुछ बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी ने गुटबाजी की चर्चा फिर तेज कर दी.
पंजाब कांग्रेस ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रोष मार्च का आयोजन किया था. इसकी अगुवाई प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट को करनी थी. पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों को कार्यक्रम में पहुंचने के निर्देश दिए गए थे.
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शुक्रवार को नेता सेक्टर-47 में जुटने लगे, लेकिन दिल्ली में व्यस्तता के चलते पायलट के चंडीगढ़ नहीं आने की जानकारी मिली. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी भी रोष मार्च में नजर नहीं आए. विधायक सुखपाल खैहरा भी कार्यक्रम से दूर रहे. चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की चर्चा लगातार होती रही है.
वड़िंग ने वरिष्ठों को साधने की कोशिश की
कार्यक्रम में वड़िंग ने एक बार फिर वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देने की बात कही. उन्होंने कहा कि वह अपने वरिष्ठ नेताओं के चरणों की मिट्टी अपने माथे पर लगाते हैं और उनसे सीखकर आगे बढ़ते हैं. इससे साफ दिखा कि प्रदेश नेतृत्व फिलहाल पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को कम करने की कोशिश में है.
वड़िंग पहले भी वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देने और उनकी बात सुनने की बात सार्वजनिक तौर पर कहते रहे हैं. माना जा रहा है कि पायलट की सक्रियता के बीच प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के लिए सभी गुटों को साथ रखना बड़ी चुनौती बन गया है.
रंधावा और परगट ने भी दिखाई नरमी
रोष मार्च में पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह का रुख भी पहले के मुकाबले नरम नजर आया. रंधावा ने कहा कि वह बुखार से परेशान थे, लेकिन फिर भी कार्यक्रम में पहुंचे, क्योंकि उनके नहीं आने पर अलग-अलग तरह की बातें बनतीं.
वहीं परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस में सभी एक हैं और अब लड़ाई पंजाब को बचाने की है. उन्होंने कहा कि पहले मतभेद जरूर थे, लेकिन मनभेद नहीं. इसके बाद वड़िंग ने परगट सिंह को मंच से ही रोष मार्च की अगुवाई करने के लिए कहा.
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हालांकि, इन बयानों के बावजूद पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी पूरी तरह खत्म हुई है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी. मंच पर एकता की तस्वीर जरूर दिख रही है, लेकिन नेताओं की गैरमौजूदगी और पुराने मतभेद बता रहे हैं कि पार्टी के अंदर कलह अभी जारी है.