पंजाब में ‘कैश फॉर पोस्टिंग-ट्रांसफर’ और नीतिगत फैसलों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में CBI ने पंजाब सरकार के 15 विभागों से गोपनीय रिकॉर्ड और अहम फाइलें तलब की हैं. CBI की EOW-II ने 4 दिसंबर 2026 तक जांच रिपोर्ट देने की तैयारी तेज कर दी है. ऐसे में पंजाब सरकार के कार्मिक विभाग ने सभी 15 विभागों को रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.
गृह, राजस्व, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, स्वास्थ्य और स्थानीय निकाय समेत कई विभाग जांच के दायरे में हैं. मुख्यमंत्री के पूर्व OSD राजबीर घुम्मन और अन्य हाई-प्रोफाइल नियुक्तियों/तबादलों से जुड़ी फाइलें भी सीबीआई ने तलब की हैं.
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद कार्रवाई
इसके अलावा, GMADA, मिल्कफेड (वेरका), PPCB और स्थानीय सरकार विभाग से जुड़े संवेदनशील मामलों के रिकॉर्ड मांगे गए हैं. स्पेशल सेक्रेटरी गौतम जैन को नोडल अधिकारी बनाया गया है. हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने रिकॉर्ड जुटाने की कार्रवाई तेज कर दी है.
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एक हफ्ते पहले CBI ने दर्ज किया था केस
सीबीआई ने पिछले सप्ताह पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद केस दर्ज किया था, जिसमें आरोपों की जांच के लिए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. आरोपियों ने आर्थिक लाभ के बदले आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती को प्रभावित किया. सीबीआई के एक प्रवक्ता ने पहले बयान में कहा था, ‘‘सीबीआई ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इनमें दो लोक सेवक, बिचौलिये और सहयोगी शामिल हैं. इनके नाम राजबीर घुम्मन, पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमि राजा महाजन, बीर देविंदर और आर. एस. नागरा हैं. इसके अलावा अज्ञात लोक सेवकों और अन्य व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है.
बता दें, इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर घुम्मन और उनके सहयोगियों के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया है. एजेंसी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की तैनाती से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की प्राथमिकी के आधार पर यह कार्रवाई की है. यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को सीबीआई को इस मामले में कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिए जाने के बाद सामने आया है.
अदालत ने, हालांकि प्राथमिकी पर रोक लगाने या जांच रोकने से इनकार कर दिया था. ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है. उन्होंने कहा कि एजेंसी जल्द ही नए सिरे से छापेमारी कर सकती है, आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है और उनकी संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है.
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