आम आदमी पार्टी (AAP) को पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तीन बड़े झटके लगे हैं. AAP के तीन मौजूदा विधायकों ने पार्टी को अलविदा कह दिया और बीजेपी के कमल को अपना लिया है. इस सियासी घटनाक्रम से पंजाब की सियासत में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. चुनावों से पहले पार्टी को मिले झटके से AAP को अब और टूट का खतरा भी सताने लगा है.
इन तीन विधायकों ने पार्टी द्वारा चुनावों के लिए पहली उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद ये कदम उठाया है. खबरें हैं कि AAP के कुछ और विधायक भी कांग्रेस और बीजेपी के संपर्क में हैं. विधानसभा चुनावों में अब काफी कम समय बचा है और अगर ऐसे ही और टूट हुई तो AAP के चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में बनाए रख पाना आसान नहीं होगा.
किन तीन विधायकों से AAP को मिला झटका?
दरअसल, अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर विधानसभा सीट से हरमीत सिंह पठानमाजरा ने सोमवार (2 नवंबर) को AAP का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं. इन विधायकों का आरोप है कि पंजाब सरकार जनता से किये वादे पूरा कर पाने में सफल नहीं रही है. हालांकि, ये भी खबरे हैं कि AAP के कई विधायकों को उम्मीद थी कि उन्हें इस बार दोबारा मौका दिया जाएगा और पहली सूची में उनका भी नाम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यही कारण है कि तीनों विधायकों के पार्टी छोड़ने के पीछे टिकट न मिलने की नाराजगी बताई जा रही है.
पहली सूची में नाम न होने से बढ़ी नाराजगी
40 उम्मीदवारों की पहली सूची में मुख्यमंत्री समेत केवल दो ही मंत्रियों के नाम शामिल होने से कई विधायक नाराज हैं. खबरें हैं कि कई विधायक तो बीजेपी और कांग्रेस के संपर्क में हैं और पार्टी बदल सकते हैं. अब विधायकों की नाराजगी के बीच AAP के लिए इस स्थिति को संतुलित करना पाना कठिन होता नजर आ रहा है. यदि AAP स्थिति को नहीं संभाल सकी तो उसकी तैयारियों को बड़ा झटका लग सकता है जो 2027 में दोबारा सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है.
बता दें कि 40 उम्मीदवारों की सूची में मंत्री संजीव अरोड़ा का नाम भी शामिल है, जो वर्तमान में एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय के एक्शन के कारण गुरूग्राम की जेल में बंद हैं. इन्हें AAP ने लुधियाना पश्चिम सीट से टिकट दिया है.
AAP के लिए 2027 की राह आसान नहीं
AAP के लिए 2027 की राह आसान होते नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि इस बार के चुनावों में सत्ता विरोधी लहर देखने की मिल सकती है और अगर ये लहर उग्र हुई तो AAP के लिए स्थित को संभाल पाना कठिन हो सकता है. इस बार राज्य में नशा, हथियार तस्करी, कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. ऐसा लगता है, जैसे AAP के लिए 2027 की राह आसान नहीं होने वाली है. अब ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि AAP कैसे स्थिति को अपने पक्ष में करती है और सत्ता में बनी रहती है.
बता दें कि पंजाब में सत्ता तक पहुंचने के लिए AAP ने बड़ी मेहनत की है. पार्टी ने साल 2016 के विधानसभा चुनावों में 117 में से केवल 20 सीटें पर ही जीत दर्ज की थी, लेकिन साल 2022 में स्थिति AAP के समर्थन में रही. पार्टी ने बड़ी छलांग लगाते हुए 92 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत की सरकार बनाई थी. साल 2022 में सत्ता विरोधी से लहर को साधते हुए एक तीसरे विकल्प के तौर पर AAP उभरकर सामने आई थी.