पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच टकराव के संकेत मिले हैं. पंजाब सरकार ने इस नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राज्य के संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे से जोड़ दिया है.
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार इस नियुक्ति प्रक्रिया से सहमत नहीं है. उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया. चीमा ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के संवैधानिक और संघीय प्रभावों पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है.
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भगवंत मान ने बुलाई कैबिनेट की बैठक
मामले को गंभीर और संवेदनशील बताते हुए चीमा ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार (6 सितंबर 2026) शाम चार बजे पंजाब कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है. बैठक में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से जुड़े कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है. सरकार राज्य के अधिकारों और नियुक्ति प्रक्रिया के प्रभावों पर अपना पक्ष तय कर सकती है.
8 सितंबर को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंजाब सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आचरण से जुड़ी अलग-अलग याचिकाओं पर 8 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है. ऐसे में चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार की आपत्ति को राजनीतिक और संवैधानिक रूप से अहम माना जा रहा है.
सरकार का कहना है कि वह नियुक्ति के संघीय प्रभाव और पंजाब के अधिकारों से जुड़े पहलुओं पर विचार कर रही है. अब सभी की नजरें कैबिनेट बैठक के फैसले और सरकार की अगली कानूनी रणनीति पर टिकी हैं.
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