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संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) अपनी मांगों को लेकर लगातार चौथे दिन भी चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं. किसानों का ये सात दिवसीय पक्का मोर्चा 1 सितंबर को शुरू हुआ था और ये सात सितंबर तक चलेगा. इस  मोर्चे की अध्यक्षता कर रहे मनजीत सिंह धनेर और बलबीर सिंह राजेवाल  कर रहे हैं.

अब किसान नेता हरिंदर सिंह लख्खोवाल ने कहा है कि यदि किसानों  की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वो देशभर में आंदोलन करेंगे. आज किसान नेताओं ने मोर्चे की अहम बैठक भी बुलाई है. इस बैठक के बाद किसान संगठन प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं.

चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों का पक्का मोर्चा आज, जानें मांगें

देशव्यापी आंदोलन की तैयारी में किसान?

दरअसल, SKM ने चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सेक्टर-48 के पास पक्का मोर्चा 1 सितंबर से लगाया हुआ है. किसानों की मांगों में कर्ज माफी और पंजाब के पानी से जुड़े पुराने समझौते को रद्द करने, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति से जुड़ी मांगे शामिल हैं. किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रमुख बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वो देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन को ले जाने की तैयारी करेंगे. 

पूरी तैयारी के साथ मोर्चे पर बैठे किसान

वहीं, मोर्चे के तीसरे दिन 3 सितंबर को किसानों ने बैठक कर आगे की रणनीति भी तय की. किसान लगातार मोर्चे पर बैठे हुए हैं, चाहे रात हो या दिन, या बारिश ही क्यों न हो. बड़ी संख्या में  ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में किसान लंगर के लिए राशन पानी की तैयारियों के साथ मोर्चा स्थल पर बैठे हुए हैं. किसानों के इस प्रदर्शन को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे जरूरत पड़ी तो वो आगे भी इसे जारी रखने की तैयारी में हैं.

पंजाबी गायक भी समर्थन में

इस प्रदर्शन में अब भी आये दिन किसान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंच रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं. महिलाएं भी मोर्चा स्थल पर पहुंच रहीं हैं. अब इस प्रोटेस्ट के समर्थन में पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल भी आ गए हैं. गुरुवार को रेशम सिंह मोर्चे पर पहुंचे थे और लंगर सेवा में भी हिस्सा लिया था.

क्या है किसानों की मांगे?

दरअसल, किसानों की मांग है कि पंजाब के सभी पुराने जल समझौतों को रद्द किया जाए ताकि पंजाब का पानी प्रदेश के किसानों को ही मिले. किसानों की मांग में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को वापस लेना और लैंड पूलिंग नीति को वापस लेने, गन्ने के दाम बढ़ाकर 500 रुपए प्रति क्विंटल करने, किसानों और मजदूरों को हर महीने दस हजार रुपये का सोशल सिक्योरिटी पेमेंट देने, तथा इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्ट और सीड बिल को वापस लेना भी शामिल है.

किसानों की ये भी मांग है कि किसानों और कृषि मजदूरों के कर्ज को माफ किया जाए, सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी की देने, डैम सेफ्टी एक्ट, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्ट और सीड बिल को वापस लेने के साथ-साथ सभी फसलों की व्यापक उत्पादन लागत (C2) पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP को तय करने आदि की भी मांग कर रहे हैं. 

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