पानीपत पुलिस अधीक्षक मेधा भूषण आईपीएस के मार्गदर्शन में थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. टीम ने अटल सेवा केंद्र की आड़ में लोगों के दस्तावेज एवं फिंगरप्रिंट लेकर उनकी एईपीएस (AEPS) आईडी तैयार कर साइबर ठगों को बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को काबू करने में बड़ी सफलता हासिल की है.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 20 लोगों के दस्तावेज का डेटा व 1 फिंगरप्रिंट स्कैनर, 1 लैपटॉप और 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. पकड़े गए आरोपियों में से एक पानीपत की विद्यानंद कॉलोनी का तथा दो आरोपी बिहार के रहने वाले हैं.
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एएसपी ने किया घटना का खुलासा
एएसपी हर्षित गोयल आईपीएस ने मंगलवार (22 सितंबर) को जिला सचिवालय स्थित पुलिस विभाग के सभागार में प्रेसवार्ता के दौरान प्रकरण का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि बीते शनिवार को थाना साइबर क्राइम प्रभारी सब इंस्पेक्टर अजय की अगुवाई में एएसआई राजबीर पुलिस टीम के साथ एक मुकदमे के अनुसंधान के सिलसिले में विद्यानंद कॉलोनी में मौजूद थे.
इसी दौरान पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली कि छोटी मस्जिद के पास अटल सेवा केंद्र चलाने वाला साकिब सीधे-साधे लोगों की अनुमति के बिना उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड तथा फिंगरप्रिंट का डेटा एकत्र कर फर्जी बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने व निकालने का काम करता है.
सूचना को पुख्ता मानते हुए पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर दबिश दी और केंद्र में मौजूद युवक को पकड़कर पूछताछ की. पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान साकिब पुत्र अतीक रहमान निवासी विद्यानंद कॉलोनी के रूप में बताई.
व्हाट्सऐप चैट से 20 लोगों का गोपनीय डेटा बरामद
मौके पर आरोपी के कब्जे से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए. मोबाइल की जांच करने पर एक व्हाट्सऐप चैट में करीब 20 व्यक्तियों के अंगूठे के निशान, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक का डेटा मिला. कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने स्वीकार किया कि वह इन दस्तावेजों व फिंगरप्रिंट के जरिए AEPS आईडी तैयार करके डेटा सहित आगे अपने सहयोगी बिहार के अररिया निवासी इश्तियाक उर्फ मलिक को भेज देता था. उसे एक फर्जी AEPS आईडी तैयार करने के बदले 3 हजार रुपए मिलते थे.
पूछताछ में यह भी पता चला कि वह सीएससी-अटल सेवा केंद्र पर आने वाले सीधे-साधे लोगों को 1 हजार रुपए का प्रलोभन देकर उनकी AEPS आईडी तैयार करवाता था. थाना साइबर क्राइम में बीएनएस की धारा 318(4) व 61 के तहत अभियोग दर्ज कर आरोपी को न्यायालय में पेश कर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई.
4 महीने से कर रहा था ये काम
आरोपी से रिमांड के दौरान खुलासा हुआ कि वह करीब 4 महीने से इस काम को कर रहा था और अब तक करीब 20 आईडी बनाकर इश्तियाक उर्फ मलिक को बेच चुका है. एएसपी हर्षित गोयल आईपीएस ने बताया कि पुलिस टीम ने 16 सितंबर को बिहार के अररिया से आरोपी इश्तियाक को गिरफ्तार किया. पूछताछ के आधार पर गिरोह के तीसरे साथी आरोपी हरिओम को भी दबोचा है.
आरोपी हरिओम आधार आईडी का डेटा इश्तियाक को देता था. इसके बाद उनके खातों से फर्जी एईपीएस आईडी में पैसे ट्रांसफर कर निकाल ठगी करते थे. 7 दिन के रिमांड के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से 2 मोबाइल फोन बरामद किए.
रिमांड अवधि पूरी होने पर मंगलवार को दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहा से उन्हें न्यायिक हिरासत जेल भेज दिया गया. आरोपी शाकिब को पहले की रिमांड अवधी पूरी होने पर जेल भेजा जा चुका है.
आधार बायोमेट्रिक लॉक कर साइबर ठगी से बचें
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षा के लिए एएसपी हर्षित गोयल आईपीएस ने आमजन से अपील की है कि वे अपने आधार बायोमेट्रिक को लॉक करके रखें. उन्होंने बताया कि फर्जी AEPS (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के जरिए होने वाले फ्रॉड से बचने के लिए बायोमेट्रिक सुरक्षा बेहद जरूरी है.
नागरिक mAadhaar ऐप या UIDAI पोर्टल के माध्यम से अपने फिंगर प्रिंट डेटा को आसानी से लॉक कर सकते हैं. बायोमेट्रिक लॉक रहने पर कोई भी आपके फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा और बैंकिंग ट्रांजैक्शन पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे.
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