फरीदाबाद (Faridabad) के डबुआ-गाजीपुर रोड स्थित नवोदय विद्या निकेतन स्कूल में 11वीं की छात्रा द्वारा तीसरी मंजिल से कूदकर जान देने के मामले ने अब बड़ा तूल पकड़ लिया है. छात्रा को कथित तौर पर कड़ी धूप में खड़ा करने की घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बेहद सख्त संज्ञान लिया है. आयोग ने इस घटना को खतरनाक बताते हुए संबंधित पुलिस और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर दिया है, ताकि जिम्मेदार शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सके.
मृतका 16 वर्षीय जानवी के पिता प्रमोद कुमार का आरोप है कि कक्षा में बिरयानी खाने को लेकर हुए झगड़े के बाद उनकी बेटी को एक शिक्षिका ने सजा के तौर पर चार घंटे तक धूप में खड़ा रखा था. इसी अपमान से आहत होकर उसने छलांग लगा दी. खून से लथपथ छात्रा ने बीके अस्पताल में दम तोड़ दिया. इस दर्दनाक घटना पर NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने क्या कहा?
प्रियंक कानूनगो ने कहा, “शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून की धारा 17 और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम की धारा 75 के तहत स्कूलों में बच्चों को किसी भी तरह का शारीरिक या मानसिक दंड देना पूरी तरह प्रतिबंधित है.”
Delhi: National Human Rights Commission (NHRC) Member Priyank Kanoongo says, “Section 17 of the Right to Education Act and Section 75 of the Juvenile Justice Act make strict provisions prohibiting any kind of physical or mental punishment or harassment of children in schools.… pic.twitter.com/AXXelOMRv7
— IANS (@ians_india) September 1, 2026
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‘धूप में खड़ा करना बेहद खतरनाक’
कानूनगो ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना अपने आप में बेहद खतरनाक है कि एक बच्ची को सजा के तौर पर तेज धूप में खड़ा किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दुर्भाग्य से उसकी जान चली गई. आयोग ने दिल्ली पुलिस और सरकार के शिक्षा विभाग को तुरंत नोटिस जारी किया है, ताकि जिम्मेदार शिक्षकों और प्रबंधन पर एफआईआर दर्ज हो सके.
प्रिंसिपल ने दी थी सफाई
बता दें कि स्कूल के प्रिंसिपल आरके शर्मा ने छात्रा को सजा देने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया था. उनके मुताबिक, जानवी बाथरूम जाने का बहाना करके कक्षा से बाहर गई थी.
इस खौफनाक घटना के बाद डबुआ थाना पुलिस पहले से ही मामले की जांच में जुटी है, लेकिन अब मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सीधे दखल के बाद स्कूल प्रबंधन की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. पुलिस और शिक्षा विभाग अब आयोग के नोटिस के आधार पर स्कूल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और अन्य सहपाठियों के बयान दर्ज कर रहे हैं. इस दुखद घटना ने स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षकों के कड़े रवैये पर एक बड़ी और गंभीर बहस छेड़ दी है.
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Input By : लता गौतम