फाजिल्का जिले की अनाज मंडी में बीते दिनों हुई बारिश से धान की फसल की नुकसान की तस्वीरें सामने आई हैं. आढ़तियों के अनुसार, बारिश का पानी करीब 2500 क्विंटल धान बहाकर ले गया, जबकि पानी में भीगे करीब 70 हजार धान के बैग की दोबारा पैकिंग (रीपैकिंग) की जा रही है. किसानों और आढ़तियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. मंडी में जगह-जगह खराब हुआ धान पड़ा है, जबकि कई किसानों की फसल पानी में बहने के कारण उसका पता तक नहीं चल पाया.
प्रशासन की ओर से नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों को सरकार के पास भेजा जाएगा, जिसके आधार पर मुआवजे को लेकर फैसला लिया जाएगा. वहीं, नुकसान झेल रहे किसानों और आढ़तियों ने सवाल उठाए हैं कि इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा.
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2500 क्विंटल धान बहने का रिपोर्ट में दावा
फाजिल्का आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष गोल्डी सचदेवा ने बताया कि भारी बारिश के कारण अनाज मंडी में कई फुट तक पानी भर गया था, जिससे धान की फसल को काफी नुकसान हुआ. आढ़तियों की ओर से प्रशासन को दी गई रिपोर्ट में करीब 2500 क्विंटल धान पानी में बहने की जानकारी दी गई है.
‘धान की रीपैकेजिंग में मेहनत और खर्च’
उन्होंने बताया कि करीब 70 हजार धान के बैग बारिश के पानी में भीग गए हैं. अब इन बोरियों से धान निकालकर पंखा लगाकर सुखाया जा रहा है और फिर से पैकिंग की जा रही है. इस प्रक्रिया में काफी मेहनत और खर्च आ रहा है. साथ ही धान की गुणवत्ता खराब होने के कारण आढ़तियों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. गोल्डी सचदेवा ने कहा कि खरीदे जा चुके धान को बारिश से नुकसान पहुंचा है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी.
बारिश की वजह से बिकी हुई फसल की बिक्री रद्द- किसान
किसान रमेश कुमार ने बताया कि वह करीब 15 एकड़ में पैदा हुई धान की फसल लेकर अनाज मंडी पहुंचे थे. उनकी पूरी फसल बिक चुकी थी, जिसमें से कुछ धान बोरियों में भी भरा जा चुका था. बारिश के बाद अब इसी धान को बोरियों से निकालकर दोबारा सुखाया और पैक किया जा रहा है. इस दौरान खराब हुए धान को अलग किया जा रहा है. किसान ने दावा किया कि उनकी खरीदी गई पूरी फसल रद्द कर दी गई है, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.
गांव दलमीर खेड़ा के किसान सराज सिंह ने बताया कि उनकी करीब तीन एकड़ धान की फसल बारिश के पानी में भीग गई. अब फसल को दोबारा सुखाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पानी में भीगने के कारण धान काला पड़ गया है. किसान के मुताबिक, तीन बार पंखा लगाने के बाद भी धान अच्छी तरह नहीं सूख रहा.
उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ करीब पांच से छह क्विंटल धान खराब हो गया है, जिसे अब कबाड़ के भाव में बेचना पड़ रहा है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि जो धान सुखाने और साफ करने के बाद खरीद के योग्य बचा है, उसे खरीदा जाए, ताकि उनके नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके. इसके साथ ही बारिश से पूरी तरह खराब हुई फसल के बदले उचित मुआवजा जारी किया जाए.
मार्केट कमेटी के सचिव मंदीप कामरा ने कहा कि उनके पास अभी कोई रिपोर्ट नहीं आई है. पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है. जिसमें आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष, डीएफएससी, संबंधित एजेंसी के अधिकारी सहित पांच लोग शामिल है. उन्होंने कहा कि बरसात के पानी बहा धान, खराब हुआ धान और भीगने के बाद सूखा धान इन तीनों एंगल से रिपोर्ट का आंकलन हो रहा है. जो वेरिफाई करने के बाद सरकार को भेज दी जाएगी. इसके बाद सरकार द्वारा मुआवजा जारी किया जाएगा.
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