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बार काउंसिल ने गुरुवार (13 अगस्त) हैदराबाद स्थित नेशनल लॉ कॉलेज (NALSAR) के स्टूडेंट्स के वकील के तौर पर एनरोलमेंट पर रोक लगाने के अपने फैसले से एक कदम पीछे खींच लिया है. बार काउंसिल ने अपने पहले के आदेश में बदलाव किया है. 

हालांकि, गुरुवार को ही जारी किए आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि कुछ टीचर्स और बाहरी लोगों ने यूनिवर्सिटी में सीजेआई कांत को बुलाए जाने पर विरोध प्रदर्शन को भड़काया था. 

नए आदेश में काउंसिल ने क्या जानकारी दी है? 

काउंसिल ने अपना पिछला आदेश वापस लेते हुए कहा है कि राज्य बार काउंसिल सभी छात्रों का बतौर वकील नामांकन कर सकते हैं. मामले में विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. बार काउंसिल ने अपने बदले हुए आदेश में इस बात को आधार बनाया है कि ज्यादातर छात्र इस मामले में निर्दोष हैं. इस स्टोरी को अब न चलाएं. हम सिर्फ यह कह सकते हैं कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मामले में विश्वविद्यालय से रिपोर्ट मांगी है.

क्या था बार काउंसिल का पिछला आदेश ? 

इससे पहले दीक्षांत समारोह में सीजेआई के शामिल होने के विरोध पर बार काउंसिल इंडिया ऑफ इंडिया ने सख्ती दिखाई थी. इसका विरोध भी देखने को मिला था. सीजेपी ने प्रमुखता से इस मुद्दे पर लगातार एक के बाद एक पोस्ट किए थे. अपने फैसले में बार काउंसिल ने 3 दिन में रिपोर्ट मांगी थी. साथ ही विरोध प्रदर्शन के आयोजकों को सूची भी मांगी गई थी. रिपोर्ट मिलने के बाद 19 अगस्त को आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने की बात कही थी. बीसीआई ने अपने आदेश में कहा था कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता. 

पूरा मामला सीजेआई सूर्यकांत के विरोध को लेकर है. उन्हें NALSAR में दीक्षांत समारोह में बतौर चीफ गेस्ट आमंत्रित किया गया था. ऐसे में उनके युवाओं पर दिए बयान को लेकर कुछ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद बार काउंसिल ने एक्शन लिया था. 



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