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कांग्रेस विधायक और रेसलर विनेश फोगाट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने पर पहली प्रतिक्रिया दी है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर विनेश ने लिखा कि हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी.

सोशल मीडिया साइट एक्स पर उन्होंने लिखा कि सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं. पर कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ती रहीं. हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृज भूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना.

फोगाट ने लिखा कि शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है. महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का निर्देश दे दिया है, और यह जल्द से जल्द की जाएगी. हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है और पहलवान अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.

बता दें 23 अप्रैल 2023 को महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया. 25 अप्रैल 2023 को उच्चतम न्यायालय ने सात महिला पहलवानों की याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया. इसके बाद 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कीं. चार मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मामला निपटा दिया कि एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और शिकायतकर्ता महिला पहलवानों को सुरक्षा देने का निर्देश दिया.

15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ यौन उत्पीड़न समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि नाबालिग पहलवान की शिकायत में जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश की. चार जुलाई 2023 को सत्र अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट पर नाबालिग पहलवान और उसके पिता से जवाब मांगा. सात जुलाई 2023 को दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग पहलवान को अदालत की निगरानी में जांच कराने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति दी, वहीं इसी दिन ट्रायल कोर्ट ने आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपियों को 18 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया. 18 जुलाई 2023 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर अदालत में पेश हुए, जहां उन्हें दो दिन की अंतरिम जमानत मिली और 20 जुलाई 2023 को नियमित जमानत दे दी गई.

2024 में क्या हुआ था?

21 मई 2024 को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और महिला की लज्जा भंग करने के आरोप तय किए, जबकि विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी का आरोप तय हुआ. हालांकि, छह महिला पहलवानों में से एक की शिकायत में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बृजभूषण को उस मामले से मुक्त कर दिया गया. एक जून 2024 से मामले की सुनवाई शुरू हुई.

26 मई 2025 को अदालत ने नाबालिग पहलवान से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर केस बंद कर दिया. दो जुलाई 2026 को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया और आखिरकार तीन अगस्त 2026 को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया.



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