पंजाब कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुए इस बदलाव ने एक बार फिर पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को चर्चा में ला दिया है. वडिंग अप्रैल 2022 से प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाल रहे थे. उनके कार्यकाल में 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
हालांकि, 2026 में पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ती गई और आखिरकार वडिंग को पद छोड़ना पड़ा. आइए पूरी टाइमलाइन से जानते हैं कि आखिर पूरा मामला किस तरह यहां तक पहुंचा.
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9 अप्रैल 2022: राजा वडिंग को मिली पंजाब कांग्रेस की कमान
अप्रैल 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया. उस समय वडिंग गिद्दड़बाहा से विधायक थे. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के हाथों सत्ता गंवानी पड़ी थी. इसके बाद पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए वडिंग को प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी.
राजा वडिंग ने 22 अप्रैल को कांग्रेस भवन में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर औपचारिक रूप से पदभार संभाला. इसके बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने और पार्टी को दोबारा सत्ता की दौड़ में लाने की कोशिश शुरू की.
2024: लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन
2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस का प्रदर्शन पार्टी के लिए अहम रहा. कांग्रेस ने राज्य की 13 में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की. खुद राजा वडिंग ने लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव जीत हासिल की. बाद में उनके समर्थकों ने इस प्रदर्शन को वडिंग के नेतृत्व के पक्ष में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया.
जून-जुलाई 2026: अध्यक्ष बदलने की चर्चा तेज
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चा तेज हो गई. पार्टी के भीतर एक धड़ा वडिंग की जगह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस की कमान देने की मांग कर रहा था. इसी दौरान पार्टी पर्यवेक्षकों ने पंजाब कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व को लेकर नेताओं से फीडबैक भी लिया.
तमाम चर्चाओं के बीच कांग्रेस हाईकमान ने 1 जुलाई को राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया. वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई. इसके अलावा विजय इंदर सिंगला समेत कई नेताओं को भी संगठन में जिम्मेदारियां दी गईं.
3 जुलाई 2026: फैसले के बाद बढ़ी खींचतान
वडिंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई. 3 जुलाई को चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में एक बैठक भी हुई, जिसमें कई नेता शामिल हुए. इसके बाद पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा एक बार फिर सामने आने लगी.
उस समय पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने वडिंग को हटाए जाने की संभावना से इनकार किया. उन्होंने कहा कि हाईकमान का फैसला अंतिम है और वडिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे.
अगस्त आते-आते वडिंग के खिलाफ पार्टी के भीतर आवाजें और खुलकर सामने आने लगीं. फिरोजपुर के सांसद शेर सिंह घुबाया ने भी उनके इस्तीफे की मांग की. हालांकि, वडिंग लगातार ऐसी चर्चाओं को खारिज करते रहे.
3 अगस्त को एक कार्यक्रम के दौरान वडिंग ने कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें हटा भी देता है तो वह कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे.
5 सितंबर 2026: सचिन पायलट बने पंजाब के प्रभारी
सितंबर में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में एक और बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया. भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया AICC प्रभारी बनाया गया. बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई.
पंजाब का प्रभारी बनने के बाद सचिन पायलट ने पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात की. रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 50 से ज्यादा नेताओं और जिला स्तर के पदाधिकारियों से संगठन को लेकर फीडबैक लिया. इस फीडबैक के आधार पर हाईकमान को रिपोर्ट दिए जाने की बात सामने आई.
30 सितंबर 2026: बदलाव का फैसला
30 सितंबर को खबर सामने आई कि कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बदलाव का फैसला कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक यह फैसला सचिन पायलट के संगठनात्मक फीडबैक के बाद लिया गया. इसी दौरान वडिंग को दिल्ली बुलाए जाने की भी चर्चा सामने आई.
इसके बाद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. पार्टी सूत्रों के हवाले से उनके इस्तीफे की पुष्टि हुई. अब कांग्रेस को जल्द ही प्रदेश संगठन के लिए नया अध्यक्ष चुनना है.
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अब आगे क्या?
नए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के लिए विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत सिंह औजला और सुखबिंदर सिंह सरकारिया समेत कई नाम चर्चा में हैं. हालांकि, इनमें से किस नाम पर हाईकमान मुहर लगाएगा, यह अभी साफ नहीं है. विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाला यह बदलाव पंजाब कांग्रेस के लिए आगे की सियासत में अहम माना जा रहा है.