जालंधर के रहने वाले अशोक मस्कीन की जिंदगी एक रील से बदल गई। इसी रील से उन्हें ऐसा ऑफर मिला कि फैक्ट्री में खराद का काम करने वाले मस्कीन कोक स्टूडियो में गाए ‘बुल्लेया वे और लगदा नीं दिल मर जाणा…’ गाकर रातों-रात स्टार बन गए। उनका गाया सॉन्ग 1.8 करोड़ लोग देख चुके हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई तक उन्हें बॉलीवुड मूवीज में गाने के साथ लाइव शोज के ऑफर तक आ रहे हैं। हालांकि अशोक की जिंदगी पहले बहुत संघर्ष से भरी रही। 15 किमी पैदल चलकर अशोक ने मशहूर पंजाबी सिंगर साबर कोटी से गायकी सीखी। हालांकि गरीबी के चलते उनकी गायकी का शौक दिहाड़ी में ही दब गया था। 50 साल की उम्र में वह फेमस हुए तो फैक्ट्री का काम छोड़ दिया और पूरा ध्यान अब सिंगिंग पर है। किस्मत बदलने पर अब पत्नी-बेटी को भी गर्व और खुशी है। दैनिक भास्कर ने जिंदगी के संघर्ष और अचानक मिली शोहरत के बारे में अशोक मस्कीन से बात की, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अशोक मस्कीन के संगीत के सफर की कहानी जानिए… जानें एक रील से कैसे बदली मस्कीन की किस्मत बेटे के ऑपरेशन का खर्च तक मुंबई के संगीतकार ने उठाया
मस्कीन ने बताया कि मुंबई के कालाकार बहुत मददगार हैं। मेरी बेटी के नाक की हड्डी में प्रॉब्लम थी, जन्म से उसका होठ भी फटा था। इसका ऑपरेशन करवाना था। बेटी को दाखिल कराया तो डॉक्टरों ने मोटा बिल बना दिया। समझ नहीं आ रहा था क्या करुं। इस
