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रोहतक में सुबह से हो रही बारिश ने अनाज मंडियों में धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है. मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा लाखों टन धान बारिश के पानी में भीग गया. इतना ही नहीं, धान से भरी बोरियां भी बारिश की चपेट में आ गईं. ऐसे में किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है. 

बारिश के बीच मंडियों में धान की सुरक्षा और खरीद व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद भी प्रशासन खुले में पड़े अनाज को नहीं ढक पाया, जिससे किसानों का धान भीग गया.

प्रशासन की लापरवाही उजागर

तेज बारिश आंधी तूफान के बाद अनाज मंडियों में किसानों का धान देखने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. हर साल प्रशासन की लापरवाही से किसानों के लाखों टन अनाज भीगने से नुकसान हो रहा है. ऐसे में मंडी प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है. दरअसल धान की फसल लेकर मंडियों में पहुंचे किसानों को पहले ही खरीद में देरी का सामना करना पड़ रहा है. 

किसानों का आरोप है कि वे पिछले तीन-तीन दिनों से मंडियों में अपनी फसल लेकर बैठे हैं, लेकिन धान की खरीद नहीं हो रही. अब बारिश ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है. किसानों का कहना है कि एक तरफ फसल बेचने के लिए उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ खुले में पड़ा धान भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का डर है. अगर धान खराब हुआ, तो इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ सकता है.

पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए थे- किसान

मंडियों में जगह-जगह खुले में पड़ा धान और बोरियों में भरी फसल बारिश में भीगती नजर आई. किसानों का कहना है कि मंडियों में धान की आवक को देखते हुए पहले से ही पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए थे, ताकि बारिश के दौरान उनकी फसल को सुरक्षित रखा जा सके. समय पर खरीद नहीं होने और फसल के खुले में पड़े रहने के कारण किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं.

वहीं, मंडी अधिकारियों का दावा है कि धान को सुरक्षित रखने के लिए शेड में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है. अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे अपना धान शेड के अंदर रखें, ताकि बारिश से फसल को नुकसान न हो. अधिकारियों का कहना है कि किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. हालांकि, सवाल यह है कि जब बारिश की आशंका थी, तो खुले में पड़े धान और भरी हुई बोरियों को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?  

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