सहारनपुर पुलिस ने 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया. सहारनपुर पुलिस की पूछताछ में आरोपियों से सोनीपत का कनेक्शन सामने आया है. बड़ी औद्योगिक क्षेत्र थाने से महज दो मिनट की दूरी पर एक फैक्ट्री में डेढ़ साल से नकली सिक्के बनाने का कारोबार चलने का खुलासा हुआ है. इस मामले ने सोनीपत पुलिस की निगरानी और इंटेलिजेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आपको बता दें कि इस फैक्ट्री में 70 करोड़ रुपये के नकली करेंसी बनाकर देश में खाप दी गई. नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का सहारनपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया. आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि प्लॉट नंबर 136 में करीब डेढ़ साल से नकली सिक्के बनाने का काम चल रहा था.
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पेचकस बनाने के लिए किराए पर ली गई थी फैक्ट्री
बताया गया कि फैक्ट्री को पेचकस बनाने के नाम पर किराये पर लिया गया था. किरायेदारों ने दिल्ली में प्रदूषण की परेशानी का हवाला देकर सोनीपत में फैक्ट्री लेने की बात कही थी. डेढ़ साल तक फैक्ट्री चलती रही और नकली सिक्के तैयार होते रहे,लेकिन स्थानीय पुलिस की नजर यहां तक नहीं पहुंची.
ऐसे हुआ नकली सिक्का बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा
सहारनपुर पुलिस ने गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये के इनामी आरोपी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, मोहाली (पंजाब), हिमांशु उर्फ गुल्लू बरसी, कुलदीप, सहारनपुर, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन मधुबनी बिहार, अनुराग पाल उर्फ लंकेश जिला संत रविदास नगर उत्तर प्रदेश के रुप में हुई है. आरोपियों ने सोनीपत में नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा किया है.
सवालों के घेरे में फैक्ट्री मालिक की अनदेखी
फिलहाल अब जांच के घेरे में सिर्फ नकली सिक्कों का गिरोह नहीं, बल्कि फैक्ट्री मालिक की अनदेखी भी सवालों के घेरे में है. 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्कों के इस खेल में मालिक की भूमिका सिर्फ अनदेखी तक सीमित थी या कहीं कहानी में कोई और कड़ी भी जुड़ती है? अब पुलिस जांच इसी सवाल का जवाब तलाश रही है.
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