[wpcode id="23"]
BREAKING India Latest News | World News | Sports | Business | Entertainment | Technology | Weather Updates | Live News 24x7


पंजाब में बिजली बिलों से जुड़ी शिकायतों को लेकर मान सरकार ने सफाई दी है. कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने कहा कि मीटर रीडरों की हड़ताल के चलते मई, जून और जुलाई में कुछ उपभोक्ताओं के बिजली बिल औसत खपत के आधार पर तैयार किए गए. इसके चलते कुछ उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली की सब्सिडी का लाभ उस तरीके से नहीं मिल पाया, जैसा मिलना चाहिए था. सरकार का कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए जल्द ही कस्टमर केयर नंबर जारी किया जाएगा.

300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का किया था वादा

कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने कहा, “लाभ को सही तरीके से पहुंचाने के लिए हमने वादा किया था कि पूरे पंजाब में हर महीने 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी और बिजली के बिल माफ किए जाएंगे. पिछले लगभग साढ़े 4 सालों से हम इस योजना को बहुत अच्छे तरीके से लागू करते आ रहे हैं.”

Punjab में अलायंस करेगी BSP? मायावती ने साफ कर दी तस्वीर

मंत्री ने बताया, “पिछले दिनों हमारे संज्ञान में हमारे कुछ उपभोक्ताओं से जुड़े एक-दो जरूरी मुद्दे आए हैं, जिन पर मैं आपके साथ चर्चा करना चाहता हूं. हमारे सामने दो प्रमुख मुद्दे आए हैं. पहला मुद्दा यह है कि पिछले 3 महीनों से हमारे कुछ उपभोक्ताओं को 300 यूनिट बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ नहीं मिला. उन्हें ऐसा लग रहा है कि उन्हें 3 महीने का बिजली बिल एक साथ लगाकर भेज दिया गया है. ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे क्या कारण था, इस पहले मुद्दे के बारे में मैं आपको बताना चाहता हूं.”

हड़ताल के कारण औसत खपत के आधार पर बने बिल

जानकारी देते हुए तरुणप्रीत सिंह सोंड ने कहा, “पिछले लंबे समय से हमारे मीटर रीडर मई, जून और जुलाई महीने में हड़ताल पर थे. इसके कारण उस दौरान हमारे पास बिजली के बिल तैयार करने का केवल एक ही सिस्टम था. हमें पिछले वर्ष के औसत बिजली बिल के आधार पर औसत रीडिंग लेकर बिल तैयार करके उपभोक्ताओं को भेजना पड़ता था.”

उन्होंने इसे एक उदाहरण के जरिए समझाया. मान लीजिए किसी उपभोक्ता ने मई में 250 यूनिट बिजली खर्च की. 300 यूनिट से कम खपत होने के कारण उसे 300 यूनिट तक की मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिलना चाहिए था और उसका बिल शून्य होना चाहिए था.

इसी तरह जून में भी अगर उसकी खपत 250 यूनिट रही, तो उसे इस महीने भी 300 यूनिट तक की सब्सिडी मिलनी चाहिए थी और बिल शून्य आना चाहिए था. लेकिन जुलाई में गर्मी बढ़ने के कारण अगर उसी उपभोक्ता की बिजली खपत 450 यूनिट हो गई, तो तीनों महीनों की कुल खपत 950 यूनिट हो गई.

950 यूनिट को 3 महीने में बांटने से बनी समस्या

मंत्री के मुताबिक सामान्य स्थिति में मई और जून में उपभोक्ता को 300-300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिलना चाहिए था, जबकि जुलाई का बिल वास्तविक खपत के आधार पर तैयार होना चाहिए था.

लेकिन मीटर रीडरों की हड़ताल के चलते औसत बिलिंग व्यवस्था में तीनों महीनों की खपत को एक साथ जोड़कर उसका औसत निकाला गया. 250, 250 और 450 यूनिट को जोड़ने पर कुल खपत 950 यूनिट हुई. इसे तीन महीनों में बांटने पर औसत खपत करीब 316.66 यूनिट प्रति महीना बन गई.

इस वजह से ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को लगा कि उन्हें 300 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ नहीं मिला और तीन महीने का बिल एक साथ भेज दिया गया.

सिर्फ 2 प्रतिशत बिल इस समस्या की श्रेणी में

सरकार का कहना है कि यह समस्या सभी उपभोक्ताओं के साथ नहीं हुई है. मंत्री ने बताया कि 98 प्रतिशत बिजली बिल सही तरीके से जनरेट हुए हैं, जबकि करीब 2 प्रतिशत बिल ही इस तरह की समस्या वाली श्रेणी में आते हैं.

उन्होंने कहा, “हम इसमें एक बहुत बड़ा काम यह कर रहे हैं कि किसी को परेशानी न हो. कल हम एक स्पेशल डेडिकेटेड कस्टमर केयर नंबर जारी करने जा रहे हैं. इस नंबर पर PSPCL के 20 सदस्यों की एक डेडिकेटेड टीम तैनात रहेगी.”

15 वर्किंग डेज में होगी बिल की जांच

सरकार की ओर से उन उपभोक्ताओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है, जिन्हें लगता है कि उनकी वास्तविक खपत के मुकाबले बिजली का बिल ज्यादा आया है.

मंत्री ने कहा, “कल जारी होने वाले इस कस्टमर केयर नंबर पर वे ग्राहक संपर्क कर सकेंगे, जिन्हें लगता है कि उनकी खपत के मुकाबले उनका बिल ज्यादा जनरेट हुआ है. मैं फिर से कह रहा हूं कि 98 प्रतिशत बिल सही तरीके से जनरेट हुए हैं और केवल 2 प्रतिशत बिल ही इस श्रेणी में आते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “इन 2 प्रतिशत ग्राहकों के लिए हम यह हेल्पलाइन नंबर जारी करेंगे. अगर इनमें से किसी ग्राहक को लगता है कि उसका बिल गलत जनरेट हुआ है, तो हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते ही हम 15 वर्किंग डेज के भीतर इसकी पूरी जांच करेंगे. अगर जांच में बिल गलत पाया जाता है, तो उसे ठीक करके नया बिल जारी किया जाएगा. अगर बिल सही पाया जाता है, तो ग्राहक को पूरी तरह संतुष्ट किया जाएगा और उन्हें बताया जाएगा कि उनके बिल में कोई समस्या है या नहीं. यह हमारा फर्ज और जिम्मेदारी है.”

आगे ऐसी समस्या रोकने के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव

सरकार ने भविष्य में इस तरह की परेशानी दोबारा न हो, इसके लिए बिजली बिलिंग सिस्टम में भी बदलाव किया है. मंत्री के मुताबिक, “सॉफ्टवेयर को अपडेट किया गया है और इसमें ऐसा विकल्प जोड़ा गया है, जिससे औसत खपत से ज्यादा का बिल अपने आप जनरेट नहीं होगा. इसके बाद उस बिल को विभाग के पास क्लैरिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा.”

उन्होंने बताया, “विभाग की टीम मौके पर जाकर उसकी पूरी तरह से जांच करेगी. जैसे ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि बिल सही है, तभी उसे जनरेट किया जाएगा. अगर जांच में बिल गलत पाया जाता है, तो वह बिल जनरेट नहीं किया जाएगा. हमारा सॉफ्टवेयर वहीं उस बिल को रोक देगा.”

Punjab में BJP फिर बोली- 117 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव, SAD के साथ कहां फंस रही बात?

सरकार का कहना है कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना का लाभ पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी है. मीटर रीडरों की हड़ताल के कारण कुछ मामलों में जो तकनीकी और बिलिंग संबंधी परेशानी सामने आई है, उसे शिकायतों के आधार पर दूर किया जाएगा.

सरकार ने साफ किया है कि जिन उपभोक्ताओं को लगता है कि उनकी वास्तविक बिजली खपत के मुकाबले ज्यादा बिल बना है, वे विशेष कस्टमर केयर नंबर पर शिकायत कर सकेंगे. इसके बाद PSPCL की 20 सदस्यीय टीम मामले की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर बिल को ठीक कर नया बिल जारी किया जाएगा.



Source link