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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को पैरोल मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है. इसके बाद से पंजाब में सियासी पारा हाई हो गया है. दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद हवारा की पैरोल की सिफारिश करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की. इस दौरान सीएम मान ने गवर्नर को आश्वासन दिया कि अगर हवारा को पैरोल मिलती है तो पंजाब में कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं देंगे.

दरअसल, जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए 10 दिन की पैरोल देने की मांग उठाई गई थी. इसके लिए पहले ही सीएम भगवंत मान राज्यपाल को चिट्ठी लिख चुके थे. दूसरी ओर, भगवंत मान की इस सिफारिश का अन्य राजनीतिक दलों ने भी समर्थन किया.

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कांग्रेस ने भी किया पैरोल का समर्थन

कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और परगट सिंह दोनों ने ही जगतार सिंह हवारा को पैरोल की सिफारिश किए जाने का स्वागत किया है. परगट सिंह ने कहा है कि यह मुख्यमंत्री का अच्छा कदम है क्योंकि जगतार सिंह हवारा की मां की तबीयत ठीक नहीं है और मानवीय आधार पर उन्हें पैरोल दी जानी चाहिए. 

जानकारी के लिए बता दें कि बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में जगतार हवाला दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. भगवंत मान ने हवारा को पैरोल देने की सिफारिश इस तथ्य के बावजूद की है कि इसी साल फरवरी में पंजाब के गृह विभाग ने तिहाड़ जेल प्रशासन को हवारा को पैरोल नहीं देने की सिफारिश की थी. 

किसी विपक्षी दल ने नहीं किया विरोध

पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों में सिख पंथक वोट बैंक को लेकर किस तरह होड़ लगी है, इसका पता इस बात से चलता है कि किसी भी विपक्षी दल ने हवारा की पैरोल का विरोध नहीं किया. 

शिरोमणि अकाली दल ने भी जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर पैरोल देने की वकालत की है. हालांकि पार्टी के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा है कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है और इनके नेता यह दावा कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बहुत बड़ा काम किया है.

अकाली दल का AAP सरकार पर निशाना

उन्होंने कहा कि इसी साल फरवरी में पंजाब सरकार के गृह विभाग ने दिल्ली में तिहाड़ जेल को जगतार हवारा को पैरोल नहीं देने की सिफारिश की थी. उन्होंने कहा कि उस वक्त गृह विभाग ने जगतार हवारा की पैरोल की अर्जी पर तिहाड़ जेल को लिखा थी. हवारा के खिलाफ 25 अपराधिक मामले हैं, इसलिए उसे पैरोल नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि पांच महीने में ही पंजाब सरकार का स्टैंड क्यों बदल गया?

‘कानून व्यवस्था पैदा नहीं होने दूंगा’- सीएम भगवंत मान

इस दौरान सीएम मान ने कहा कि मैंने राज्यपाल को यह विश्वास दिलाया है कि अगर हवारा को पैरोल दी जाती है तो कानून व्यवस्था की कोई स्थिति पैदा नहीं होने दी जाएगी. आज खुद मिलकर इस मुद्दे को राज्यपाल के सामने उठाया है.

पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार एक तरफ जहां हिंदू वोट बैंक को रिझाने में लगी है और “एक शाम भगवान शिव के नाम” और “हमारे राम” जैसे कार्यक्रम करवा रही है वहीं सिख पंथक वोट बैंक को रिझाने के लिए मुख्यमंत्री ने हवारा को पैरोल की सिफारिश की है.

BJP का क्या है स्टैंड?

भारतीय जनता पार्टी ने भी जगतार हवारा को पैरोल दिए जाने का विरोध नहीं किया है. हालांकि पार्टी के विधायक और पूर्व पंजाब अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने मुख्यमंत्री द्वारा पैरोल की सिफारिश की चिट्ठी लिखे जाने के वक्त पर सवाल उठाया है और कहा है कि आज ही क्यों भगवंत मान को इसका ध्यान आया है?

सिख पंथक क्षेत्रों में बड़ा नाम है हवारा

सिख पंथक क्षेत्रों में जगतार हवारा की खासी अपील है और कोई भी राजनीतिक दल विधानसभा चुनावों से पहले इन्हें नाराज नहीं करना चाहता है. हालांकि सभी राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि मानवीय आधार पर देखने की बात कही है.

राजनीतिक दलों का इस मुद्दे पर पक्ष इसलिए भी अहम है क्योंकि जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह का संगठन ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ तेजी से पंजाब के कई क्षेत्रों में अपनी पकड़ बना रहा है और सिख पंथक वोट बैंक पर इसकी मजबूत पकड़ बन रही है. 

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