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चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उन्होंने ‘कॉकरोच’ को लेकर वैसी कोई टिप्पणी नहीं की थी, जैसा कि उन्हें गलत तरीके से उद्धृत करके बताया गया. सीजेआई ने कहा कि सुनवाई के दौरान उनकी ओर से की गई मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से कोट किया गया और बाद में उसका इस्तेमाल देश के युवाओं को बरगलाने के लिए किया गया.

उनकी यह टिप्पणी ‘कॉकरोच पार्टी’ बनाए जाने के संदर्भ में आई. डीडी न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मेरी टिप्पणी को न सिर्फ गलत तरीके से लिया गया, बल्कि उसका गलत तरीके से इस्तेमाल भी किया गया. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.”

इसके अलावा सीजेआई ने बिना संदर्भ के कोर्ट की कार्यवाही की छोटी क्लिप्स (रील वीडियो) के फैलने पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा, “चाहें आप सोशल मीडिया पर हों, या प्रिंट मीडिया में हों या किसी भी तरह की मीडिया में हों या फिर आप सिर्फ एक नागरिक हों. हम सभी के कुछ अधिकार और संवैधानिक और जिम्मेदारियां हैं.”

उन्होंने कहा, “जब हम अधिकारों की बात करते हैं, तो हमें अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की क्षमता भी रखनी चाहिए. इसलिए मैं उनसे अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखने की अपील करूंगा. हम सभी को समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए.”

क्या है पूरा मामला

पूरा विवाद 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई से जुड़ा है. यहां सीजेआई ने फर्जी डिग्री वाले कुछ लोगों की तुलना कॉकरोच से की थी. यह टिप्पणी उन लोगों के लिए थी, जो सिस्टम का विरोध करने के लिए सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं. 

सीजेआई की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई. इससे युवाओं में नाराजगी बढ़ गई. इसने सोशल मीडिया पर एक कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन को जन्म दिया. बाद में सीजेपी के नेतृत्व में नीट यूजी पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और स्टूडेंट में झड़प भी हुई. इन विरोध प्रदर्शन को देखते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.



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