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कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. पार्टी की छवि सुधारने और संगठन को मजबूत करने के प्रयासों के बीच उन्होंने पार्टी की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत को अहम निर्देश दिए हैं. राहुल गांधी ने कहा है कि सोशल मीडिया पर प्रमुख मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने में कौन नेता कितना सक्रिय है, इसकी मासिक रिपोर्ट तैयार कर उन्हें सौंपी जाए.

उनका मानना है कि पार्टी के नेताओं की डिजिटल उपस्थिति और बड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता का नियमित आकलन किया जाना चाहिए. सूत्रों के अनुसार, यह कदम पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने और नेताओं की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाया गया है. राहुल गांधी चाहते हैं कि पार्टी के नेता महत्वपूर्ण राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक सक्रियता से अपनी बात रखें.

राहुल गांधी की तरफ से ये निर्देश ऐसे समय में दिया गया है जब बीजेपी के नेताओं ने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के राष्‍ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद गाने के फैसले पर कांग्रेस की आलोचना की. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देश तोड़ने की राजनीति की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के टुकड़े करने के कारण देश को इसके परिणाम भुगतने पड़े.

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् के पूर्ण गान की जगह केवल दो अंतरे गाने का जो फैसला किया है, वह न केवल देश विरोधी है, बल्कि संसद के बनाए कानून की खुली अवहेलना भी है. कांग्रेस ने ही 1937 में तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े किए. वहीं से दो-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली और देश का विभाजन हुआ.’ 

उन्होंने कहा, ‘वंदे मातरम् के 150वें वर्ष पर पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह ऐतिहासिक गलती सुधारी और पूर्ण गान को कानूनी स्वरूप दिया, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस फिर उसी वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण के रास्ते पर है.’



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