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रेप के दोषी डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 21 दिन की फरलो मिली है जिससे उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. साल 2017 में दोषी पाए जाने के बाद राम रहीम को 20 साल की सजा हुई थी. सजा के 9 साल पूरे होने को आए हैं और यह अब तक राम रहीम की 17वीं पैरोल/फरलो है. इसी साल जनवरी में उसे 40 और फिर मई में 30 दिन की पैरोल मिली थी. इसके बाद अब 21 दिन की फरलो मिली है, जिसके बाद उसे अब तक कुल 91 दिन की रिलीज मिल चुकी है.

साल 2025, 2024, 2023 और 2022 में भी पैरोल और फरलो की संख्या यही है. हर साल तीन बार और 91 दिन की रिलीज. दरअसल, हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 के तहत कैदियों को मिलने वाली पैरोल और फरलो के नियम और अधिकतम अवधि तय की गई है. 

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सामान्य तौर पर कैदियों के लिए एक साल में कुल 10 हफ्ते यानी 70 दिन की पैरोल का प्रावधान है, जिसे पूरे साल में अलग-अलग चरणों में लिया जा सकता है. इसी के साथ 21 दिन की फरलो ली जा सकती है. पैरोल और फरलो मिलाकर यह आंकड़ा 91 दिन तक पहुंचता है. यानी राम रहीम को हर साल इस पूरी अवधि के लिए रिलीज किया जाता है.

पैरोल की अवधि सजा में नहीं होती काउंट

जानकारी के लिए बता दें कि पैरोल पर जेल से बाहर बिताया गया समय सजा की कुल अवधि में नहीं गिना जाता. कैदी को किसी खास या जरूरी काम के लिए कोर्ट पैरोल की मंजूरी देता है. पैरोल के लिए कैदी को ठोस और स्पष्ट वजह बतानी होगी. कोर्ट जब मानेगा कि उसकी वजह पैरोल योग्य है, तभी कैदी को अस्थायी रिहाई की मंजूरी मिलती है. पैरोल की अवधि पूरी होने पर कैदी को वापस जेल जाना होता है और बाहर काटा हुआ समय असल सजा की अवधि से आगे बढ़कर पूरा करना होता है.

सजा की अवधि में गिनी जाती है फरलो

फरलो कैदी के अच्छे व्यवहार को देखते हुए बिना किसी खास वजह के दी जाती है. फरलो की अधिकतम अवधि एक साल में 21 दिन की होती है. इसे सजा के ड्यूरेशन में गिना जाता है. यानी कैदी के बाहर आने पर भी उसे जेल की सजा में काउंट किया जाता है.

एक तरह से कहा जाए तो पैरोल कैदी का अधिकार नहीं होता. प्रशासन और अदालत फैसला करते हैं कि कैदी की जरूरत पैरोल योग्य है या नहीं. वहीं, फरलो को आमतौर पर कैदी का हक माना जाता है. 

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