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आपकी खाने की थाली आने वाले समय में पहले से काफी अलग हो सकती है. अब लोग सिर्फ पेट भरने या स्वाद के लिए फूड नहीं चुन रहे, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि उसमें कितना प्रोटीन है, कितने पोषक तत्व हैं और वह सेहत के लिए कितना बेहतर है. इस पसंद का असर अब देश के फूड सेक्टर में भी नजर आने लगा है. प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फंक्शनल फूड, न्यूट्रास्युटिकल्स और प्राकृतिक इनग्रेडिएंट्स की डिमांड काफी तेजी से बढ़ी है. इसका मतलब है कि आने वाले वक्त में सुपरमार्केट और ऑनलाइन ग्रॉसरी ऐप्स पर आपको ऐसे फूड ऑप्शंस मिलेंगे, जो स्वाद के साथ पोषण का भी दावा करेंगे.

कैलोरी गिनने से आगे बढ़े लोग, अब प्रोटीन पर नजर

कुछ साल पहले तक हेल्दी डाइट का मतलब अक्सर कम कैलोरी वाला खाना माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. मुंबई में चल रहे एफआई इंडिया 2026 और प्रोपैक इंडिया 2026 में फूड इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने बताया कि लोगों में अब कैलोरी से ज्यादा पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. खासकर प्रोटीन को लेकर लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है.

ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स असोसिएशन के वेस्ट जोन चेयरमैन डॉ. प्रबोध हल्दे के मुताबिक, इसका असर युवाओं, जिम जाने वालों और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों के साथ-साथ आम परिवारों की खरीदारी पर भी नजर आने लगा है. दाल, सोया, पनीर और दूध जैसे पारंपरिक प्रोटीन सोर्सेज के साथ अब बाजार में प्लांट-बेस्ड मीट, प्रोटीन ड्रिंक, प्रोटीन स्नैक्स और दूसरे हाई-प्रोटीन फूड्स के ऑप्शंस भी बढ़ रहे हैं.

क्यों बढ़ रहा प्लांट बेस्ड फूड?

प्लांट-बेस्ड फूड ऐसे प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें पौधों से मिलने वाली सामग्री इस्तेमाल होती है. इनमें सोया, मटर, दाल और दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. प्लांट-बेस्ड फूड्स इंडस्ट्री असोसिएशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रवीर श्रीवास्तव के मुताबिक, भारत के इस सेक्टर की ग्रोथ करीब 18 पर्सेंट की सालाना की स्पीड से हो रही है. वहीं, इसका ग्लोबल औसत 7-8 पर्सेंट है. 

क्यों बढ़ रही इसकी डिमांड?

इसका बड़ा कारण लोगों का अपनी डाइट को लेकर ज्यादा जागरूक होना है. कुछ लोग मीट का सेवन कम करना चाहते हैं तो कुछ लोग पर्यावरण को लेकर चिंतित हैं और कुछ लोग अपनी डाइट में नए प्रोटीन ऑप्शंस जोड़ना चाहते हैं. इन सभी वजहों से प्लांट-बेस्ड फूड की मांग बढ़ रही है।

5 साल में दोगुना हो सकता है प्लांट प्रोटीन का बाजार

भारत में प्लांट-प्रोटीन इनग्रेडिएंट्स का बाजार अभी करीब 4500 करोड़ रुपये का है. इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के एमडी योगेश मुद्रास की मानें तो अगले पांच साल में यह बाजार दोगुना हो सकता है. हालांकि, दिलचस्प पहलू यह है कि अभी भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 90 पर्सेंट प्लांट-प्रोटीन इनग्रेडिएंट्स विदेशों से आते हैं. इनका उत्पादन देश में बढ़ता है तो भारतीय ग्राहकों को ऐसे प्रोडक्ट्स के ज्यादा ऑप्शंस मिल सकते हैं.

आपकी थाली में आने वाले हैं नए हेल्दी ऑप्शन

फंक्शनल फूड और न्यूट्रास्युटिकल्स भी इस बदलाव का हिस्सा हैं. आसान भाषा में समझें तो ऐसे फूड प्रोडक्ट्स, जिनमें सामान्य पोषण के अलावा किसी खास हेल्थ नीड्स को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट तैयार किया जाता है, उनकी मांग बढ़ रही है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में बाजार में आपको प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और दूसरे पोषक तत्वों पर फोकस करने वाले नए प्रोडक्ट्स ज्यादा देखने को मिल सकते हैं. 

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