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ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने शनिवार को बड़ा बयान दिया है. पूर्व आर्मी चीफ ने  भारत का पाकिस्तान को लेकर नजरिए में आए बदलाव को लेकर अपनी राय रखी है. पीटीआई ने अपनी खबर में बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के प्रति भारत के नजरिए में एक बहुत बड़ा बदलाव था. इन हमलों में न सिर्फ बॉर्डर के पास आतंकी ठिकनों को बल्कि पड़ोसी देश के अंदर उनके समर्थकों को भी निशाना बनाया गया. 

स्टार्ट अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए वडोदरा में एक प्राइवेट इवेंट में शामिल होने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद किए गए इस ऑपरेशन ने दिखाया कि आतंकियों को सपोर्ट करने वाले लोग भारतीय कार्रवाई से बच नहीं सकते. चाहे वे कहीं भी हों. 28वें आर्मी चीफ के तौर पर काम कर चुके नरवणे ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद किया गया ऑपरेशन सिंदूर एक बहुत जरूरी कार्रवाई थी. उन्होंने उरी और पुलवामा समेत पहले के आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भारत का मिलिट्री रिस्पॉन्स ज्यादातर बॉर्डर रके पास मौजूद आतंकी ठिकानों पर फोकस्ड था. 

उन्होंने कहा, ‘पहले जब भी ऐसे हमले होते थे, जैसे उरी के बाद और पुलवामा के बाद बालाकोट स्ट्राइक हम ज्यादातर बॉर्डर के पास आतंकी ठिकानों को टारगेट करते थे. लेकिन इस बार जनरल नरवणे ने कहा कि हमले में उनके समर्थकों और उन्हें समर्थन देने वालों को निशाना बनाया गया. चाहें, वे कही भी हों. सिर्फ कंट्रोल लाइन के पास नहीं. बल्कि पाकिस्तान के अंदर मुरीदके और बहावलपुर में जहां से उन्हें यह समर्थन मिलता है. इसलिए, यह हमारे तौर-तरीकों में बहुत महत्वपूर्ण बदलाव था.  भारत ने दिखा दिया है कि जो लोग कहीं भी आतंकवाद को समर्थन दे रहे हैं. वे बच नहीं सकते. जैसा कि हमारे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हम उनके क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, और उन्हें खत्म कर देंगे. उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं होगी.’

पाकिस्तान भारत के मुकाबले कहीं नहीं है: नरवणे

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ‘घबराने की कोई बात नहीं है. जो भी कार्रवाई करने की जरूरत होगी, सही समय पर उचित कार्रवाई की जाएगा. इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान भारत का मुकाबला करने में सक्षम है, इस पर नरवणे ने कहा कि नहीं. इसके अलावा उन्होंने भारत और चीन रिश्ते पर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हाल की वार्ता को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बैठक विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का 25वां दौर थी. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. उन्होंने कहा कि यह चर्चा हमारी ओर से अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की वार्ता पहली बार नहीं हो रही है.’ 

उन्होंने कहा कि सीमांकन की कमी की वजह से भारत और चीन के बीच कभी कभी झगड़े होते हैं. प्रस्तावित थिएटर कमांडर पर जनरल नरवणे ने कहा कि आर्म्ड फोर्सेज के थिएटराइजेशन पर चर्चा कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई थी. यह कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है. इस तरह की चर्चा सबसे पहले कारिगल युद्ध के बाद शुरू हुई थी. तब से अबतक 25 से 26 साल हो चुके हैं. 



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