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आजकल शहरों में भी लोग अपने घर की बालकनी या छत पर छोटा किचन गार्डन बनाकर सब्जियां उगाने का शौक रखने लगे हैं. इसी कड़ी में लाल आलू यानी रेड पोटैटो एक ऐसी सब्जी है, जिसे गमलों में भी आसानी से उगाया जा सकता है. सामान्य आलू की तुलना में लाल आलू न सिर्फ स्वाद में अलग होता है, बल्कि इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भी ज्यादा पाई जाती है. यही वजह है कि सेहत का ध्यान रखने वाले लोग अब इसे अपने खान-पान में शामिल करने लगे हैं.

किचन गार्डन के लिए सही गमले और मिट्टी का चुनाव

लाल आलू उगाने के लिए सबसे पहले गहरे गमले या ग्रो बैग का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. मिट्टी हल्की, भुरभुरी और अच्छे जल निकासी वाली होनी चाहिए. मिट्टी में गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाने से पौधे की बढ़वार बेहतर होती है. गमले में जल निकासी के लिए तली में छोटे छेद जरूर होने चाहिए, ताकि पानी जमा न हो और आलू सड़ने की समस्या न आए.

बीज आलू लगाने का सही तरीका

लाल आलू उगाने के लिए बाजार से अच्छी क्वालिटी के बीज आलू लाने चाहिए, जिन पर आंखें यानी अंकुर साफ दिखाई दें। बड़े आलू को दो या तीन टुकड़ों में काटकर लगाया जा सकता है, बशर्ते हर टुकड़े में कम से कम एक अंकुर जरूर हो. कटे हुए टुकड़ों को लगाने से पहले एक-दो दिन छांव में सूखने देना चाहिए, इससे सड़न की आशंका कम हो जाती है. इसके बाद टुकड़ों को मिट्टी में करीब चार से पांच इंच गहराई में लगाना चाहिए.

पानी और धूप का रखें खास ध्यान

लाल आलू के पौधे को नियमित लेकिन सीमित मात्रा में पानी देना जरूरी होता है। ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं, इसलिए मिट्टी को हल्का नम रखना ही काफी होता है. इसके अलावा पौधे को रोजाना कम से कम पांच से छह घंटे की धूप मिलनी चाहिए, तभी इसकी बढ़वार अच्छी होती है. जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता है, तने के आसपास मिट्टी चढ़ाते रहना चाहिए, इससे आलू का आकार भी बेहतर बनता है.

कब और कैसे करें तुड़ाई

लाल आलू की फसल आमतौर पर 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है. जब पौधे की पत्तियां और तना पीला पड़कर सूखने लगे, तो यह संकेत होता है कि आलू खोदने का समय आ गया है. तुड़ाई के समय ध्यान रखें कि आलू को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए मिट्टी को हल्के हाथों से खोदना चाहिए.

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सेहत के लिए फायदेमंद है लाल आलू

लाल आलू में फाइबर, विटामिन-सी और पोटैशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसका छिलका पतला होने के कारण इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी ज्यादा माने जाते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, लाल आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य आलू की तुलना में थोड़ा कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है.

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