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पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कई बड़े चेहरे मैदान में उतरने वाले हैं. इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी हो सकते हैं जो कभी पुलिस सेवा में रहे और फिर राजनीति से जुड़ गए. या यूं कहें कि पंजाब पुलिस का नाता सियासत से काफी पुराना है और समय-समय पर नए चेहरे देखने को मिलते रहे हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति या सेवा छोड़ने के बाद राजनीति का चोला पहना.

कुछ को जीत मिली कुछ हार के बाद भी सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने रहे. 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यही सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस महकमे से कोई नया चेहरा दिखाई देगा? या फिर पहले से सक्रिय चेहरों पर पार्टियां दांव खेलेंगी?

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मोहम्मद इजहार आलम और सिमरजीत सिंह मान 

सबसे पहले बात करेंगे पूर्व DGP मोहम्मद इजहार आलम की जिन्होंने रिटायर होने के बाद साल 2009 में SAD का दामन थामा था. तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें 18 नवंबर 2009 में पंजाब वक्फ बोर्ड का चेयरमैन भी बनाया था. उनकी पत्नी फरजाना निसारा खातून साल 2012 में मलेरकोटला सीट से विधायक रही हैं.  वहीं, पूर्व पुलिस अधिकारी सिमरजीत सिंह मान ने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में इस्तीफा दिया था. बाद में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) बनाया था. वो तरनतारन और संगरूर से सांसद भी रहे. 

परमदीप सिंह गिल और परगट सिंह

पंजाब के पूर्व DGP परमदीप सिंह गिल की बात करें तो उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (SAD) का हाथ थामने के बाद साल 2012 में मोगा से चुनाव लड़ा था. उन्हें कांग्रेस के जोगिंदर पाल जैन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. गिल को केवल 57,575 वोट मिले थे, जबकि जैन को 62,200 वोट मिले थे. वहीं, पूर्व पुलिस अधीक्षक (SP) और हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह ने पुलिस सेवा से निवृत्त होने के बाद राजनीति में कदम रखा था. सिंह ने साल 2012, 2017 और 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ा है. सबसे पहले उन्होंने SAD की टिकट से  जालंधर कैंट सीट से चुनाव लड़ा था और कांग्रेस उम्मीदवार जगबीर सिंह बराड़ को हराया था.

परगट सिंह साल 2017 में वो कांग्रेस में शामिल हो गए और कांग्रेस की टिकट से जालंधर कैंट सीट ही चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत दर्द की. इसके बाद वो पंजाब सरकार में खेल और शिक्षा मंत्री भी बने. साल 2022 में इसी सीट से दोबारा चुनाव लड़कर जीत की हैट्रिक लगाई थी. अब 2027  वो चुनाव लड़ेंगे या नहीं समय बताएगा. 

सज्जन सिंह चीमा और कुंवर विजय प्रताप सिंह

अर्जुन पुरस्कार विजेता बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा ने पुलिस सेवा के बाद  2017 और 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) की टिकट पर सुल्तानपुर लोधी से  विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों बार ही उन्हें हार मिली थी. 

पूर्व पुलिस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने साल 2021 में AAP का दामन थामा था. उन्होंने समय से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर राजनीति में कदम रखा था. अप्रैल 2021 में उन्होंने  पुलिस महानिरीक्षक (IGP) के पद से इस्तीफा दिया था.  साल 2022 के विधानसभा चुनावों में अमृतसर उत्तर से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. हालांकि, 2025 में AAP ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उन्हें 5 साल के लिए सस्पेंड कर दिया है. 

बलकार सिंह और फौजा सिंह सरारी

पूर्व पुलिस अधिकारी बलकार सिंह ने जनवरी 2021 में  पुलिस उपायुक्त (DCP) पद से रिटायर होने के बाद 15 जून 2021को AAP में शामिल हुए थे. इसके बाद साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जालंधर जिले की करतारपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर  कैबिनेट में शामिल हुए थे. हालांकि, सितंबर 2024 में मान सरकार ने उन्हें कैबिनेट से हटा दिया था. 

पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे फौजा सिंह सरारी ने 36 सालों तक पुलिस में सेवा दी है. साल 2022 के विधानसभा चुनावों में AAP की टिकट पर गुरुहरसहाय सीट से चुनाव जीता था. इसके बाद  भगवंत मान की कैबिनेट में शामिल भी हुए थे, लेकिन साल 2023 में विवाद के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. 

 इसके अलावा पूर्व ADGP गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने अप्रैल 2024 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर कांग्रेस का दामन थामा था. हालांकि उन्होंने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है. अब सबकी निगाहें 2027 के विधानसभा चुनावों पर है कि इस बार भी खाकी से कोई नया चेहरा मैदान में उतरेगा या नहीं. 

 

 

 

 

 

 



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