यमुनानगर में हर साल 500 से ज्यादा जानें फेफड़ों की बीमारी की चपेट में आने की बात सामने आई है. इससे भी हैरानी की बात यह है कि यमुनानगर जिला हर साल पूरे हरियाणा में मौत के मामले में नंबर वन पर रहा. माइनिंग जोन स्टोन क्रशर, प्लाईवुड और स्टील इंडस्ट्री से निकलने वाला प्रदूषण क्या लोगों के फेफड़ों को अंदर से बीमार कर रहा है?
अब यमुनानगर की CMO डॉ. दिव्या मंगला ने भी लोगों को चेताया है. तीन सप्ताह से ज्यादा खांसी है तो इसे हल्के में मत लीजिए क्योंकि लगातार खांसी छाती में जकड़न और सांस की परेशानी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है.
हरियाणा में फेफड़ों की बीमारी से 25 हजार से अधिक मौतें
डॉ. दिव्या मंगला ने कहा, “ये सिर्फ धुआं नहीं खतरे की वो परत है, जो हर सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंच रही है. यमुनानगर में उद्योगों की रफ्तार बढ़ी तो प्रदूषण भी चिंता का बड़ा कारण बनता गया.” उन्होंने बताया कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 से 2026 के बीच हरियाणा में फेफड़ों की बीमारी से 25 हजार से ज्यादा मौतें दर्ज होने की बात सामने आई है. यमुनानगर की तस्वीर भी चिंताजनक है, जहां हर साल 500 से ज्यादा लोगों की मौत फेफड़ों की बीमारी से होने की बात सामने आई है. माइनिंग और स्टोन क्रशर से निकलने वाला पार्टिकुलेट मैटर प्लाईवुड और स्टील इंडस्ट्री से होने वाला प्रदूषण और हवा में मौजूद अलग-अलग प्रदूषक ये सब मिलकर सांसों के लिए खतरा बढ़ा सकते हैं.
बीड़ी और सिगरेट का धुआं फेफड़ों का दुश्मन
CMO ने कहा कि फेफड़ों के लिए खतरा सिर्फ फैक्ट्रियों और क्रशर से निकलने वाले प्रदूषण तक सीमित नहीं है. बीड़ी और सिगरेट का धुआं भी फेफड़ों का बड़ा दुश्मन है. खतरा सिर्फ धूम्रपान करने वाले तक नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद लोग भी धुएं के संपर्क में आ सकते हैं. वहीं, ग्रामीण इलाकों में आज भी कई घरों में लकड़ी और गोबर के उपलों से खाना पकाया जाता है. घर के भीतर पैदा होने वाला ये धुआं भी लंबे समय तक सांस के साथ शरीर में पहुंचता है, जिसका असर खासतौर पर महिलाओं पर पड़ सकता है.
लक्षण को न करें नजरअंदाज
CMO ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी ये है कि फेफड़ों की कई बीमारियों के शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य नजर आते हैं. लगातार खांसी, बार-बार जुकाम, छाती में जकड़न, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को लोग अक्सर मौसम बदलने या सामान्य एलर्जी समझकर टाल देते हैं, लेकिन बीमारी गंभीर होने पर लक्षण ज्यादा चिंताजनक हो सकते हैं. ऐसे में समय पर डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच बेहद अहम हो जाती है.
बचाव कैसे हो?
CMO ने बताया कि डॉक्टर की सलाह साफ है, अगर तीन सप्ताह से ज्यादा लगातार खांसी है तो इसे सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज न करें. छाती में लगातार जकड़न सांस लेने में परेशानी या दूसरे लगातार बने रहने वाले लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लें. प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर निकलते समय उचित मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके साथ घर के आसपास हरियाली बढ़ाना संतुलित आहार लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी जरूरी है.
यमुनानगर में उद्योग विकास की पहचान हैं, लेकिन विकास की कीमत लोगों की सेहत नहीं होनी चाहिए. फेफड़ों की बीमारी से जुड़ा मौतों का आंकड़ा एक बड़ा स्वास्थ्य अलार्म है. जरूरत है प्रदूषण के स्रोतों पर सख्ती. इसके साथ ही हवा को साफ रखने की और सबसे जरूरी अपने शरीर के संकेतों को समझने की.