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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी हुई नकदी को कम करने के लिए एक अहम कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने सरकारी बॉन्ड की ओपन मार्केट बिक्री (OMO) के जरिए बाजार में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री करने का फैसला किया है. हालांकि, यह बिक्री सितंबर में तीन अलग-अलग चरणों में होगी. 

दरअसल, भारतीय बैंकिंग सिस्टम में इस वक्त जरूरत से पैसों की भरमार है. इससे रातोंरात मिलने वाली ब्याज दरें रेपो रेट से नीचे चली गई हैं. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अतिरिक्त पैसा को सिस्टम से बाहर निकालकर बाजार में ब्याज दरों को संतुलित रखना चाहता है. 

तीन किस्तों में होगी 1 लाख करोड़ के बॉन्ड की बिक्री

RBI के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज की OMO बिक्री तीन नीलामियों के जरिए की जाएगी. 

  • 17 सितंबर 2026: 50,000 करोड़ रुपये
  • 21 सितंबर 2026: 25,000 करोड़ रुपये
  • 28 सितंबर 2026: 25,000 करोड़ रुपये

इन तीनों बिक्री को मिलाकर कुल रकम 1 लाख करोड़ रुपये होगी. वहीं इसकी नीलामी मल्टीपल-प्राइस मेथड के जरिए की जाएगी.

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बैंकों में क्यों बढ़ गई इतनी ज्यादा रकम?

दरअसल, बैंकिंग सिस्टम में अचानक इतनी ज्यादा रकम बढ़ने की एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा का भारी प्रवाह भी है. विशेष फॉरेक्स स्कीम के तहत बैंकों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा करीब 127 अरब डॉलर जुटाए. यानी भारतीय करेंसी में यह रकम करीब 12.16 करोड़ रुपए है. इससे RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी हुई और बैंकिंग सिस्टम में रुपये की लिक्विडिटी भी बढ़ गई.

इसका नतीजा यह हुआ कि इस सप्ताह बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही. यानी इन दिनों बैंकों के पास उनकी जरूरत के हिसाब से काफी ज्यादा पैसे मौजूद है.  

RBI को ज्यादा रकम बाजार से क्यों निकालना पड़ रहा है?

RBI के मुताबिक, जब बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा पैसा होता है, तो ऐसे में बैंक कम ब्याज दर पर भी पैसा उधार देने के लिए तैयार हो सकते हैं. जिसका सीधा असर शॉर्ट टर्म ब्याज दरों पर पड़ता है. यही वजह है कि मौजूदा स्थिति में ओवरनाइट ब्याज दरें RBI की पॉलिसी रेपो रेट से नीचे जाने लगी थीं. ऐसे में RBI ने अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से बाहर निकालने का ऐलान किया है. 

OMO के जरिए पैसा कैसे निकलता है?

ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के जरिए RBI बाजार में सरकारी बॉन्ड खरीदता या बेचता है. ऐसे में जब RBI सरकारी बॉन्ड बेचता है, तो बैंक और दूसरे पात्र निवेशक उन्हें खरीदने के लिए पैसे देते हैं. यानी आम लफ्जों में समझें तो RBI जब बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड बाजार में बेचता है, तो बॉन्ड सप्लाई बढ़ती है. 

RBI के ऐलान का बॉन्ड बाजार पर क्या असर पड़ा?

RBI के OMO सेल के ऐलान के बाद इसका असर सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी देखने को मिला. बॉन्ड यील्ड में तेजी आई और 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.035% पहुंच गई. वहीं 5 साल के बॉन्ड की यील्ड भी बढ़कर 6.6222% हो गई.

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