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लद्दाख में मौजूद पैंगोंग त्सो झील भारत की सबसे खूबसूरत और रहस्यमयी झीलों मेंगिनी जाती है, जो अपने बदलते रंगों की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है. यह झील कभई हल्के फिरोजी रंग में नजर आती है, तो कभी गहरे नीले और हरे रंग में बदल जाती है. सुबह, दोपहर और शाम के हिसाब से ही नहीं, बल्कि मौसम बदलने के साथ भी इसका रंग अलग-अलग शेड्स में बदल जाता है. फिल्म 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स सीन के बाद यह झील घरेलू पर्यटकों के बीच और भी ज्यादा पॉपुलर हो गई थी. आइए जानते हैं कि आखिर यह झील बार-बार अपना रंग क्यों बदलती है और यहां की यात्रा कैसे की जा सकती है. 

क्यों बदलता है झील का रंग?

पैंगोंग त्सो करीब 14,270 फीट यानी 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक खारे पानी की झील है, जो भारत की सबसे ऊंची झीलों में से एक मानी जाती है. इसका रंग सूरज की रोशनी पड़ने के एंगल, आसमान में मौजूद बादलों, पानी के तापमान और आसपास के पहाड़ों से पड़ने वाली परछाई पर निर्भर करता है. गर्मियों में जब झील का पानी पिघलकर साफ हो जाता है, तब इसमें नीले और फिरोजी रंग के कई शेड्स दिखते हैं, जबकि सर्दियों में यह पूरी तरह जमकर बर्फ की चादर जैसी नजर आती है.

झील की लंबाई और खासियत

पैंगोंग त्सो करीब 134 किलोमीटर लंबी झील है, जिसका करीब 60 प्रतिशत हिस्सा तिब्बत मे और बाकी हिस्सा भारत में पड़ता है. इसकी चौड़ाई सबसे ज्यादा जगह पर करीब 5 किलोमीटर तक है, जिससे यह देखने में समुद्र जैसी विशाल लगती है. खारे पानी की झील होने की वजह से यहां मछलियां नहीं पाई जातीं, लेकिन हर साल प्रवासी पक्षी प्रजनन के लिए यहां जरूर आते हैं. 

यहां जाने का सबसे सही समय

पैंगोंग त्सो घूमने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर के बीच माना जाता है, जब लद्दाख की सड़कें पूरी तरह खुली रहती हैं और मौसम भी घूमने लायक रहता है. इस दौरान झील अपने सबसे खूबसूरत रंगों में नजर आती है. जनवरी से माार्च के बीच झील पूरी तरह जम जाती है, जिसे देखना भी अपने आप में एक अलग अनुभव होता है, लेकिन इस दौरान ठहरने के विकल्प बेहद सीमित रहते हैं और मौसम बेहद ठंडा होता है. 

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कैसे पहुंचें पैंगोंग त्सो झील?

पैंगोंग त्सो झील लेह से करीब 150 से 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, और वहां पहुंचने में करीब 5 से 6 घंटे का समय लगता है. लेह से झील तक पहुंचने के लिए चांग चा दर्रे से होकर जाना पड़ता है, जो करीब 17,590 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इसके अलावा न्युब्रा वैली या माहे-चुशल-मेराक रोड के रास्ते से भी झील तक पहुंचा जा सकता है. लेह में कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट है. जहां से देश के बड़े शहरों के लिए सीधी फ्लाइट मिल जाती है. 

परमिट और जरूरी सावधानियां

पैंगोंग झील भारत-चीन सीमा के बेहद करीब स्थित है, इसलिए यहां जाने के लिए इनर ऑनलाइन परमिट लेना अनिवार्य होता है. यह परमिट लेह में मौजूद डीसी ऑफिस से या ऑनलाइन दोनों तरीकों से बनवाया जा सकता है. इतनी ज्यादा ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और पर्याप्त पानी साथ रखना भी इस ट्रिप को सुरक्षित बनाने के लिए बेहद जरूरी है. 

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