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समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज है. इसी बीच मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार की ओर से 2017 में विधि आयोग को लिखी गई चिट्ठी चर्चा में है. रिपोर्टों के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष बीएस चौहान को पत्र लिखकर UCC को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी थीं.

नीतीश कुमार ने तब कहा था कि देश की धार्मिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए UCC पर व्यापक सहमति जरूरी है. उनकी चिंता थी कि अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समूहों को विश्वास में लिए बिना कानून लागू करने से सामाजिक स्तर पर तनाव पैदा हो सकता है. मौजूदा बहस में इसी पुराने रुख का हवाला JDU के कुछ नेता दे रहे हैं.

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धार्मिक स्वतंत्रता का भी किया था जिक्र

नीतीश कुमार के 2017 के रुख में धार्मिक स्वतंत्रता और विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने की बात भी सामने आई थी. UCC का विषय संविधान के अनुच्छेद 44 से जुड़ा है, जिसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने की बात कही गई है. हालांकि यह नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और अदालत में सीधे लागू कराने योग्य मौलिक अधिकार नहीं है.

अमित शाह के बयान के बाद फिर गरमाया मुद्दा

UCC को लेकर मौजूदा राजनीतिक बहस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद तेज हुई, जिसमें NDA शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने का लक्ष्य बताया गया. इसके बाद बिहार में JDU नेताओं के बीच भी अलग-अलग बयान सामने आए. पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पहले UCC का प्रारूप और उसके प्रावधान सामने आने चाहिए, उसके बाद पार्टी विचार कर फैसला करेगी.

JDU बोले- प्रारूप देखने के बाद होगा फैसला

JDU की मौजूदा स्थिति यह है कि पार्टी पहले प्रस्तावित कानून के प्रावधानों का अध्ययन करेगी. विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यदि किसी प्रावधान को लेकर चिंता होगी तो केंद्र से बातचीत की जाएगी और सभी पक्षों को ध्यान में रखने की जरूरत है. ऐसे में 2017 की नीतीश कुमार की चिट्ठी और पार्टी के मौजूदा रुख के बीच UCC को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस आगे बढ़ती दिख रही है.

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