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Manjhaul hospital cardboard box video: बिहार से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. इसमें एक मरीज के टूटे हुए पैर पर प्लास्टर की जगह गत्ते का डिब्बा बांध दिया गया. यह मामला बेगूसराय के मंझौल अस्पताल का है, जो केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के इलाके में आता है.

क्या था मामला?

यह वीडियो The Bihar नाम के एक X अकाउंट से शेयर किया गया. पता चला है कि एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार हो गया था, जिससे उसका पैर टूट गया. इलाज के लिए उसे मंझौल अस्पताल ले जाया गया. लेकिन वहां जो हुआ, उसे देखकर सब हैरान रह गए.

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वीडियो में साफ दिख रहा है कि अस्पताल में मरीज के टूटे पैर पर सही प्लास्टर लगाने की बजाय एक गत्ते का डिब्बा काटकर बांध दिया गया. मरीज बेड पर दर्द से तड़पता नजर आ रहा है, और उसके पैर पर यह गत्ता कपड़े से बांधा गया है. यह देखकर कोई भी समझ सकता है कि उस समय अस्पताल में मरीज को कितनी तकलीफ हुई होगी.

लोगों ने क्या कहा?

यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और लोग इस पर गुस्सा जताने लगे. बहुत से लोगों ने सरकारी अस्पतालों की हालत पर सवाल उठाए. कुछ ने कहा कि यह सीधे-सीधे लापरवाही है और मरीज के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए था.

लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल में प्लास्टर जैसी छोटी सी चीज भी नहीं है, तो मरीजों को कितनी दिक्कत होती होगी, यह सोचने वाली बात है. बहुत सारे लोगों ने इसे स्वास्थ्य विभाग की बड़ी गलती बताया और सवाल किया कि इसका जिम्मेदार कौन है. कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि इतने बड़े नेता के इलाके में अस्पताल की हालत इतनी खराब कैसे हो सकती है.

अस्पतालों की हालत पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर बताती है कि छोटे शहरों और गांव के सरकारी अस्पतालों में जरूरी सामान की कितनी कमी है. ऐसी खबरें पहले भी सामने आती रही हैं, जहां मरीजों को सही समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता. इससे मरीज की हालत और खराब होने का डर बना रहता है.

गांव और छोटे शहरों में रहने वाले लोग अक्सर इन्हीं सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि प्राइवेट अस्पताल जाना उनके लिए महंगा पड़ता है. ऐसे में अगर सरकारी अस्पताल में ही बुनियादी चीजें न मिलें, तो आम आदमी कहां जाए, यह एक बड़ा सवाल बन जाता है.

यह वीडियो फिर से यह सवाल खड़ा करता है कि सरकारी अस्पतालों में जरूरी चीजों की इतनी कमी क्यों है, और इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है. अभी तक अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं आया है.

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