पंजाब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की कमान परगट सिंह को सौंपकर एक बड़ा सियासी संकेत दिया है. जालंधर से आने वाले पूर्व हॉकी कप्तान और पूर्व मंत्री परगट सिंह अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे. उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली है. ऐसे समय में जब कांग्रेस के भीतर अलग-अलग नेताओं के खेमे नजर आते रहे हैं, परगट के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी को साथ लेकर चलने की होगी.
कांग्रेस ने लंबे अंतराल के बाद दोआबा क्षेत्र के किसी नेता को प्रदेश संगठन की कमान दी है. इससे पहले मोहिंदर सिंह केपी 2008 से 2010 तक पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे. उनके बाद यह जिम्मेदारी कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, सुनील जाखड़, नवजोत सिंह सिद्धू और राजा वड़िंग जैसे नेताओं के पास रही. ऐसे में परगट की नियुक्ति को पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
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मालवा में कांग्रेस की पकड़ बढ़ाना बड़ी चुनौती
पंजाब की राजनीति में मालवा का चुनावी महत्व सबसे ज्यादा है. ऐसे में सिर्फ दोआबा में अपनी पकड़ मजबूत करना परगट के लिए काफी नहीं होगा. उन्हें मालवा और माझा में भी पार्टी संगठन को सक्रिय करना पड़ेगा.
जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ना, नेताओं के बीच तालमेल बनाना और चुनाव से पहले मजबूत टीम तैयार करना उनकी प्राथमिकता में रहेगा.
परगट के सामने चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, राजा वड़िंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती भी होगी. टिकट बंटवारे और स्थानीय स्तर की गुटबाजी से ऊपर उठकर संगठन को चुनाव के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा.
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वहीं पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने परगट सिंह को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी.
पायलट ने कहा कि परगट को मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के विचारों को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ आम लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाना होगा. उन्होंने कहा कि पंजाब बदलाव की राह देख रहा है और कांग्रेस को जनता के बीच सक्रिय रहना होगा.