हरियाणा सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के बीच कॉलेज की मान्यता को लेकर चल रहे विवाद के बीच छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. अपनी मांगों को लेकर नाराज छात्रों ने गुरुग्राम के साइबर सिटी इलाके में सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की. मामले की सूचना मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे.
मौके पर पहुंचे अधिकारी ने बताया कि हरियाणा सरकार ने पूर्व में एनसीटीई (NCTE) के समक्ष मान्यता के लिए आवेदन किया था. एनसीटीई की 325वीं बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी और वीडियोग्राफी कराने के निर्देश जारी किए गए थे. हालांकि, कोरोना काल के दौरान समय-सीमा में आए व्यवधान और तकनीकी पेचों के कारण यह मामला उलझ गया.
एससीईआरटी के अधिकारी ने क्या बताया?
एससीईआरटी के अधिकारी की मानें तो छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इन छात्रों को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव एनसीटीई को भेजा था. वर्तमान में यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कपिल नाथ बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के नाम से विचाराधीन है.
सरकार की ओर से इस मामले में पैरवी के लिए खुद एडवोकेट बीआर मल्होत्रा कोर्ट में पेश हुए हैं. उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल, वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री ने इस विषय में केंद्रीय मंत्रालय और एनसीटीई को कई बार पत्र लिखे हैं. कोर्ट में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को तय की गई है.
छात्रों के आरोपों का अधिकारी ने किया खंडन
छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन या सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की हेरफेर या वादाखिलाफी नहीं की जा रही है. उन्होंने छात्रों से अपील की कि सड़क जाम करने के बजाय वे फुटपाथ या परिसर के भीतर बैठकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखें.
प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया, जिसके बाद छात्र अधिकारियों से बातचीत करने के लिए परिसर के भीतर गए. प्रशासन का कहना है कि वे छात्रों की समस्याओं का उचित समाधान निकालने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत हैं.
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