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Nana Patekar News: नाना पाटेकर को आपने बड़े पर्दे पर कई किरदार निभाते देखा होगा, लेकिन कैमरा बंद होने के बाद उनकी जिंदगी का एक अलग ही रंग था. चमक-दमक से दूर वह अपना काफी वक्त खेत-खलिहान और गांव के माहौल में बिताना पसंद करते थे. पुणे के पास उनका एक बड़ा फार्महाउस था, जहां वह खुद खेती से जुड़े काम देखते थे. दिलचस्प बात यह है कि इस खेत में उगने वाली फसल सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं रहती थी. नाना की खेती और किसानों से जुड़ी सोच उनकी सादगी और जमीन से जुड़े रिश्ते की एक अलग कहानी बताती है.

नाना पाटेकर का पुणे के पास खड़कवासला इलाके में करीब 27 एकड़ का फार्महाउस था. यह सिर्फ आराम करने की जगह नहीं थी, बल्कि यहां वह खेती भी करते थे. फार्महाउस में करीब सात कमरे और बड़ा हॉल था. नाना यहां सादा जीवन जीना पसंद करते थे और खेती-किसानी के काम में भी दिलचस्पी लेते थे.

गेहूं, धान से लेकर सब्जियों तक की खेती

नाना पाटेकर अपने फार्महाउस गेहूं और धान जैसी फसलें उगाते थे. साथ ही यहां बाजरा और अलग-अलग सब्जियों की खेती भी होती है. इसके अलाव चना और दूसरी फसलों भी यहां उगाई जाती थी. यानी फिल्मों की चकाचौंध से दूर उनका यह फार्महाउस खेती-किसानी से जुड़ी एक अलग ही दुनिया दिखाता था. खास बात यह थी कि नाना खेती को सिर्फ शौक के तौर पर नहीं देखते थे. फार्म पर उगाई गई फसल बेचने के बाद उससे मिलने वाली कमाई का हिस्सा किसानों और वहां काम करने वाले लोगों के साथ बांटा जाता था.

गाय-बैल और दूसरे पशु भी पालते थे

नाना पाटेकर का खेती से जुड़ाव सिर्फ खेतों और फसलों तक ही नहीं था. उनके फार्महाउस पर खेती के साथ पशुपालन भी होता था. यहां गाय और बैल तो थे ही, लेकिन साथ ही बकरियों और मुर्गियों का भा पालन यहां होता था. 2023 में एक इंटरव्यू से जुड़ी रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना के दौरान उन्होंने फार्महाउस पर पांच कुत्तों, 12 गायों और दो बैलों के साथ काफी समय बिताया. यानी उस दौर में उनका काफी वक्त खेतों और पशुओं के बीच ही गुजरता था.

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किसानों की मदद से भी जुड़ा रहा नाम

खेती से उनका जुड़ाव सिर्फ अपने फार्महाउस तक नहीं था. नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने सितंबर 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत की थी. संस्था का काम सूखे से परेशान किसानों, किसान परिवारों और गांवों में पानी से जुड़ी समस्याओं पर काम करना रहा है. संस्था के मुताबिक, बाद में जल संरक्षण, गांवों के विकास और किसानों की मदद से जुड़े कई काम भी किए गए.

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