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AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (8 अगस्त) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए IIT दिल्ली प्रशासन की कड़ी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी वाले दीक्षांत समारोह में वैदिक मंत्रों के जाप के दौरान सिर झुकाने और खड़े रहने का निर्देश दिया था. 

हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने दावा किया कि मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि छात्रों को बताया गया था कि प्रधानमंत्री के सामने सिर कितना झुकाना है और वैदिक मंत्रों के पाठ के दौरान खड़े रहने को कहा गया था. उन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लंघन करते हैं, जो सरकारी फंड से चलने वाले शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा देने पर रोक लगाता है.

क्या बोले ओवैसी?

ओवैसी ने यह भी कहा कि यह समारोह अनुच्छेद 51A(h) का उल्लंघन करता है, जो नागरिकों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने को बढ़ावा देता है. उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि कभी-कभी राष्ट्रीय हित में सरकार के गलत कामों के खिलाफ खड़ा होना जरूरी होता है. AIMIM प्रमुख बहादुरपुरा में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे, जहां उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनकी पार्टी का ध्यान हैदराबाद के विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य करने पर है.

इससे पहले दिन में, ओवैसी ने ज़ू पार्क से आरामघर चौराहा तक 2.24 करोड़ रुपये की LED मॉडल लाइटों का उद्घाटन किया और हाशिमाबाद की टॉवर गली में 1.24 करोड़ रुपये की लागत से बॉक्स ड्रेन का काम शुरू किया, साथ ही अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजनाओं की भी घोषणा की.

IIT दिल्ली प्रशासन ने ओवैसी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. ओवैसी की ये बातें शिक्षण संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों और आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान छात्रों के व्यवहार को लेकर चल रही बहस के बीच आई हैं. छात्रों को दिए गए कथित निर्देशों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और निर्देशों की असल प्रकृति स्पष्ट नहीं है.

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तेलंगाना वोटर्स से की ये अपील

इसके अलावा, ओवैसी ने तेलंगाना के मतदाताओं से विशेष सारांश संशोधन (Special Summary Revision) के लिए 10 अगस्त की समय-सीमा से पहले बूथ स्तर के अधिकारियों को अपने गणना फॉर्म (enumeration forms) जमा करने की पुरजोर अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न करने से नागरिकता की स्थिति प्रभावित हो सकती है और भविष्य में पासपोर्ट प्राप्त करने या संपत्ति के लेन-देन में बाधाए आ सकती हैं. 

AIMIM ने 200 से अधिक वरिष्ठ वकीलों की एक टीम बनाई है जो उन नागरिकों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करेगी जिन्हें ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद चुनाव पंजीकरण अधिकारी से नोटिस मिलेगा.

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