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विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को सरकार ने संयुक्त समिति यानी JPC को भेजने का फैसला किया है. सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. इससे पहले राज्यसभा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में कांग्रेस और टीएमसी ने FCRA बिल को वापस लेने की मांग की थी. 

FCRA बिल का खासतौर पर ईसाई समुदाय के साथ विपक्षी पार्टियां लगातार विरोध कर रही है. आज ही तमिलनाडु विधानसभा ने FCRA बिल का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया.

तमिलनाडु में प्रस्ताव पास

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, प्रस्ताव में केंद्र से इस विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया गया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि इस संशोधन से परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता विशेष रूप से अल्पसंख्यकों की तरफ से चलाए जा रहे शैक्षणिक और समाज कल्याण संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ सकता है. प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

मिजोरम में विरोध

वहीं मिजोरम की राजधानी आइजोल में अलग-अलग ईसाई समुदायों के हज़ारों लोगों ने विधेयक के विरोध में रैली निकाली. यह रैली काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम (सीसीएम) के आह्वान पर आयोजित की गई थी. यह 9 बड़े चर्च का एक समूह है, जिसमें प्रेस्बिटेरियन चर्च ऑफ इंडिया और बैपटिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम (बीसीएम) भी ​​शामिल हैं.

वहीं नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उनसे FCRA में प्रस्तावित संशोधनों पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव से चर्चों और ईसाई धर्मार्थ संगठनों पर बोझ पड़ सकता है और राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है.

रियो ने कहा कि विदेशी योगदान (रेगुलेशन) एक्ट में संशोधनों को पूरी जांच के लिए संसदीय समिति को भेजा जाए, जिसमें संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधियों को अपने विचार रखने का मौका दिया जाए.

सरकार के कदम से ईसाई समुदायों में संशय

इस साल जून में सरकार ने विदेशी धन प्राप्त करने के लिए एफसीआरए के नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी. इसके तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को पहले से निर्धारित उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों में से किसी एक का चयन करना अनिवार्य किया गया था. इन नियमों में धार्मिक आस्था से जुड़ी कई गतिविधियों की अनुमति दी गई है, लेकिन एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए पात्र कई श्रेणियों में धर्म-प्रचार को बाहर रखा गया है.

FCRA अमेंडमेंट बिल, 2026 इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और पार्लियामेंट के चल रहे मानसून सेशन में इस पर चर्चा होने की उम्मीद थी. हालांकि विपक्ष के हंगामे के चलते कोई खास विधायी काम नहीं हो सका है. इस बीच एफसीआर को पास कराने का प्लान सरकार ने फिलहाल टाल दिया है.

Input By : पीटीआई



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