आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब प्रभारी और पदाधिकारी गायत्री बिश्नोई ने चंडीगढ़ में उन्हें आवंटित सरकारी बंगला खाली कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार आम आदमी पार्टी पर सवाल उठा रहा था. बिश्नोई को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर सरकारी आवास के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए.
खैरा ने आरोप लगाया था कि गायत्री बिश्नोई पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ चंडीगढ़ के सरकारी बंगले में रह रही थीं. यह बंगला सेक्टर 39ए में स्थित है और बंगला नंबर 960 पंजाब सरकार में मंत्री राजवोत सिंह को आवंटित बताया गया था.
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खैरा ने सवाल उठाया कि जब बिश्नोई पंजाब सरकार में मंत्री नहीं हैं, तो उन्हें मंत्रियों के लिए आवंटित सरकारी आवास में रहने की सुविधा कैसे मिली. इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया.
बिश्नोई ने दी थी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सुखपाल सिंह खैरा की टिप्पणी पर गायत्री बिश्नोई ने भी जवाब दिया था. उन्होंने खैरा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी. हालांकि, अब उनके सरकारी बंगला खाली करने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी इस विवाद को ज्यादा बड़ा रूप लेने से रोकना चाहती थी. पार्टी के लिए यह मामला अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास को लेकर हुए विवाद की याद भी दिला रहा था.
दिल्ली में केजरीवाल के सरकारी बंगले के नवीनीकरण पर हुए खर्च को लेकर बीजेपी ने काफी सवाल उठाए थे और इसे ‘शीश महल’ का नाम देकर चुनावी मुद्दा बनाया था.
चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं पर फोकस
पंजाब विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही बाकी हैं. ऐसे में आम आदमी पार्टी का जोर सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने और उनके जरिए लोगों तक पहुंच बनाने पर है.
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सरकारी आवास को लेकर शुरू हुआ यह विवाद पार्टी के लिए चुनाव से पहले एक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता था. बंगला खाली किए जाने के बाद अब इस मामले पर सियासी बहस किस दिशा में जाती है, यह देखना अहम होगा.