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Bhawana Kanth: भारतीय वायुसेना IAF की जांबाज अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. बिहार की बेटी भावना कंठ देश की पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर बन गई हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रतिष्ठित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट TACDE से इस बेहद कठिन और प्रतिष्ठित कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया है. इस बड़ी कामयाबी के बाद से ही हर तरफ उनकी चर्चा हो रही है और लोग यह जानने के लिए उतावले हैं कि इस नए और बड़े पद पर उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी. 

भावना कंठ के बारे में जानिए

स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ मुख्य रूप से बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली हैं. उनका जन्म बरौनी में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी बरौनी रिफाइनरी के डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई. स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद वह इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा चली गईं. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री ली. पढ़ाई पूरी करने के बाद भावना ने टीसीएस कंपनी में नौकरी शुरू की. बाद में उनका सेलेक्शन भारतीय वायु सेना में हो गया, जहां से उन्होंने एक फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया. 

कितनी मिलेगी सैलरी

भावना कंठ को 7वें वेतन आयोग नियमों के अनुसार, फाइटर कॉम्बैट लीडर रैंक पर हर महीने लगभग 1.55 लाख से 1.90 लाख रुपये की इन-हैंड सैलरी मिलेगी. इसमें 69,400 रुपये मूल वेतन के साथ मिलिट्री सर्विस पे, फ्लाइंग अलाउंस और महंगाई भत्ता जैसे कई विशेष भत्ते शामिल हैं. इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास और मुफ्त मेडिकल जैसी बेहतरीन सुविधाएं भी मिलती हैं. 

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क्या होता है फाइटर कॉम्बैट लीडर?

वायुसेना का फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स बहुत ही मुश्किल माना जाता है. इसकी तुलना दुनिया की सबसे कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग में से एक, अमेरिका के मशहूर  टॉप गन प्रोग्राम से की जाती है. इस कोर्स के लिए भारतीय वायुसेना के सिर्फ टॉप 1% सबसे अनुभवी फाइटर पायलट्स को ही शॉर्टलिस्ट किया जाता है, और कड़ी परीक्षा के कारण इनमें से भी कई लोग इसे पूरा नहीं कर पाते. भावना कंठ ने 20 हफ्तों की इस बेहद कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह बड़ी कामयाबी हासिल की है. 

इस कोर्स को पास करने के बाद भावना कंठ अब सिर्फ एक सामान्य पायलट नहीं रही हैं, बल्कि वे युद्ध के मैदान में एक मास्टरमाइंड और लीडर का रोल निभाएंगी. इसका मतलब यह है कि जंग के समय वे हवा में लड़ाकू विमानों के पूरे ग्रुप को लीड करेंगी. मिशन की पूरी प्लानिंग करना और यह तय करना कि किस हथियार का इस्तेमाल कब, कहां और कैसे करना है. ये सभी अहम जिम्मेदारियां अब उन्हीं के हाथों में होंगी. 

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