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  • झारखंड सरकार ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं को किया था रद्द.
  • इस फैसले को नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट में दी थी चुनौती, जिस पर लगा स्टे.
  • स्टे के बाद बिहार के राजनीतिक दलों की ओर से अब हेमंत सरकार पर किया जा रहा है हमला.

झारखंड में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाई कोर्ट की ओर से गुरुवार (20 अगस्त, 2026) को स्टे लगाए जाने के बाद अब बिहार में भी सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. बीजेपी और जेडीयू की ओर से आज (शुक्रवार) बड़ा बयान आया है.

बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने ये महसूस किया कि जितने भी परीक्षाएं हुई हैं उसमें हेराफेरी हुई है. उस हेराफेरी की बहुत ही विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, “न्यायालय पहले इस चीज को विस्तृत तौर पर जानना चाहती है कि ये जो परीक्षा रद्द हुई है इसका समुचित कारण क्या है? और इसीलिए स्टे लगाया जाता है.”

‘न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए स्टे’

जेडीयू नेता राजीव रंजन ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया. कहा कि इस स्टे को न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए. सुनवाई जारी रहेगी. छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था, लेकिन जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो गई थी, अब वो कोर्ट पहुंचे हैं, तो जाहिर है कि उनकी भी बात सुनी जाएगी.

सोरेन सरकार पूरी तरह से बेनकाब: नीरज कुमार

जेडीयू एमएलसी और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला. कहा, “झारखंड सरकार ने नौजवानों की पीड़ा को नहीं समझा. छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार ने परीक्षाएं रद्द कर दी थी. अब भले ही कोर्ट ने उस पर स्टे लगा दिया है, लेकिन सोरेन सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो गई है.”

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गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने छात्र आंदोलन और पेपर लीक के आरोपों के बाद 11वीं से 13वीं जेपीएससी समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था. सरकार के इस फैसले को नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गुरुवार को सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है.

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