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लैपटॉप खरीदते समय प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज के साथ बैटरी बैकअप भी एक अहम फैक्टर होता है. लेकिन कई लोगों को ये समझ नहीं आता कि एक बार फुल चार्ज करने के बाद लैपटॉप का कितनी देर चलना नॉर्मल माना जाए. इसका कोई एक तय जवाब नहीं है क्योंकि बैटरी बैकअप लैपटॉप के मॉडल, बैटरी क्षमता और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है.

आपको बता दें कि नॉर्मली एक मॉडर्न लैपटॉप हल्के से मीडियम इस्तेमाल में 5 से 8 घंटे तक चल सकता है. वहीं नए और बेहतर बैटरी ऑप्टिमाइजेशन वाले लैपटॉप करीब 8 से 12 घंटे या उससे ज्यादा का बैकअप भी दे सकता है.

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अगर आप सिर्फ वेब ब्राउजिंग, डॉक्यूमेंट बनाना, ईमेल चेक करना या वीडियो देखना जैसे सामान्य काम करते हैं तो 6-8 घंटे का बैकअप काफी अच्छा माना जाता है. लेकिन वहीं, गेमिंग लैपटॉप में कंडिशन अलग होती है क्योंकि हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर और GPU ज्यादा पावर लेते हैं.

काम के हिसाब से बदलता है बैटरी बैकअप

लैपटॉप की बैटरी कितनी देर चलेगी, ये आपके काम पर काफी निर्भर करता है. अगर आपको वेब ब्राउजिंग, MS Word, ईमेल और नॉर्मल काम में बैटरी ज्यादा देर चल सकती है. वहीं, YouTube या OTT पर लगातार वीडियो देखने से बैटरी तेजी से कम होती है. इसके अलावा Premiere Pro, Photoshop जैसे भारी सॉफ्टवेयर चलाने पर CPU और GPU का इस्तेमाल बढ़ जाता है जिससे बैटरी जल्दी खत्म होती है.

स्क्रीन ब्राइटनेस का भी पड़ता है असर

लैपटॉप की स्क्रीन भी बैटरी खपत में बड़ी भूमिका निभाती है. अगर ब्राइटनेस हमेशा 100 प्रतिशत पर रहती है तो बैटरी जल्दी खत्म होती है. जरूरत के मुताबिक ब्राइटनेस कम रखने और कीबोर्ड बैकलाइट बंद करने से बैटरी बैकअप में सुधार हो सकता है. इसी तरह Wi-Fi, Bluetooth, बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स और USB से जुड़े डिवाइस भी कुछ एक्सट्रा पावर इस्तेमाल करते हैं.

बैटरी की सेहत भी है जरूरी

अगर नया लैपटॉप 7-8 घंटे चल रहा था लेकिन कुछ साल बाद वही बैटरी मुश्किल से 3-4 घंटे चलती है तो ये हमेशा खराबी का संकेत नहीं है. समय के साथ लिथियम-आयन बैटरी की पावर कम होती जाती है. बैटरी की कंडिशन देखने के लिए Windows में Battery Report बनाया जा सकता है. इससे डिजाइन कैपेसिटी और मौजूदा फुल-चार्ज कैपेसिटी के बीच का अंतर का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

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