राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने राजस्थान में एनएसडी का क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल सेंटर) स्थापित किए जाने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- एक रंगकर्मी होने के नाते वह चाहते हैं कि देश के हर राज्य में एनएसडी का एक केंद्र हो। जयपुर में आयोजित थिएटर वर्कशॉप कोलाज ऑफ किलकारी के समापन पर त्रिपाठी ने कहा कि हर स्कूल में थिएटर विषय होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा, समाज में कला, संगीत और रंगमंच के प्रति बने नजरिए को ‘चिंटू और पिंटू’ की काल्पनिक थ्योरी से समझाया। उन्होंने कहा- हर स्कूल में दो तरह के छात्र होते हैं। एक पिंटू, जो गणित में 98 प्रतिशत अंक लाता है और दूसरा चिंटू 85 प्रतिशत अंक लाता है। चिंटू बेहतरीन गायक, तबला वादक या कलाकार भी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में आमतौर पर पिंटू को ज्यादा महत्व मिलता है। शिक्षक उसे अपना ब्लू-आइड बॉय मानते हैं, क्योंकि समाज यह मान बैठा है कि अच्छे अंक लाने वाला ही आगे चलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा। वहीं चिंटू की कला और प्रतिभा को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। कला को व्यक्तित्व विकास का हिस्सा मानना अहम त्रिपाठी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जैसे ही किसी स्कूल में कोई मंत्री, सांसद, कलेक्टर या अन्य गणमान्य व्यक्ति आने वाले होते हैं, अचानक स्कूल प्रशासन को चिंटू की याद आ जा
